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July 17, 2026

हिमाचल : लिव-इन में रह रहे थे 16-17 साल के बच्चे, पढ़ाई भी छोड़ दी- नहीं होना चाहते दूर

बाल कल्याण समिति ने अभिभावकों से की विशेष अपील

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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के पधर क्षेत्र में संयुक्त विभागीय टीम ने समय रहते कार्रवाई करते हुए दो नाबालिग लड़कों और दो नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। चारों किशोर-किशोरियां एक साथ रह रहे थे।

लिव-इन में रह रहे थे 16-17 साल के बच्चे

सूचना मिलने के बाद संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और सभी को बाल संरक्षण कानूनों के तहत सुरक्षित संरक्षण में लिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया, काउंसिलिंग और बाल कल्याण समिति CWC के निर्देशों के बाद चारों नाबालिगों को उनके अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया गया।

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सूचना मिलते ही सक्रिय हुई संयुक्त टीम

मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और चारों किशोर-किशोरियों से पूछताछ की। प्रारंभिक बातचीत के दौरान उन्होंने टीम को गुमराह करने का प्रयास किया।

मगर अधिकारियों ने धैर्यपूर्वक जांच जारी रखी और तथ्यों की पुष्टि करने के बाद सभी को सुरक्षित संरक्षण में ले लिया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा और उनके हित सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसी कारण बिना किसी जल्दबाजी के पूरे मामले की संवेदनशीलता के साथ जांच की गई।

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अलग-अलग केंद्रों में रखा गया सुरक्षित

रेस्क्यू के बाद दोनों नाबालिग लड़कों को ओपन शेल्टर होम भेजा गया, जबकि दोनों नाबालिग लड़कियों को अस्थायी रूप से वन स्टॉप सेंटर में रखा गया। यहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया और विशेषज्ञों द्वारा उनकी काउंसिलिंग भी की गई। इसके बाद चारों को बाल कल्याण समिति CWC के समक्ष पेश किया गया, जहां समिति ने सभी पक्षों की बात सुनी और पूरे मामले की समीक्षा की।

लड़कियों ने समिति के सामने रखी अपनी बात

बाल कल्याण समिति के समक्ष पेशी के दौरान दोनों नाबालिग लड़कियों ने लड़कों के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की। हालांकि समिति ने मामले को केवल उनकी इच्छा के आधार पर नहीं, बल्कि कानून और बच्चों के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए देखा। सभी संबंधित बच्चे नाबालिग थे, इसलिए समिति ने किशोर न्याय अधिनियम और बाल संरक्षण के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई की।

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पढ़ाई बीच में छोड़ चुके थे चारों

जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि चारों किशोर-किशोरियां अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके थे। इसे गंभीरता से लेते हुए बाल कल्याण समिति ने अभिभावकों को बुलाया और उनसे विस्तृत चर्चा की।

नजर रखने की सलाह दी

समिति ने माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा जारी रखने, उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर ध्यान देने तथा नियमित रूप से उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की सलाह दी। साथ ही यह भी कहा गया कि अगर बच्चों के व्यवहार में किसी प्रकार का बदलाव दिखाई दे या वे किसी समस्या से गुजर रहे हों, तो समय रहते संबंधित विभागों या विशेषज्ञों से संपर्क किया जाए।

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कानूनी प्रक्रिया के बाद परिजनों को सौंपे बच्चे

सभी आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई, काउंसिलिंग और कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चारों नाबालिगों को उनके अभिभावकों के हवाले कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे भी आवश्यक निगरानी रखी जाएगी।

अभिभावकों से की गई विशेष अपील

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष अलकनंदा हांडा ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें और उनकी दिनचर्या, मित्र मंडली तथा गतिविधियों पर सकारात्मक नजर रखें। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था बच्चों के जीवन का संवेदनशील दौर होता है, ऐसे में परिवार का सहयोग और मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है।

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बाधित ना हो बच्चों की पढ़ाई

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। अगर परिवार या बच्चे किसी सामाजिक, मानसिक या अन्य समस्या का सामना कर रहे हों तो संबंधित सरकारी विभागों, बाल संरक्षण इकाइयों या काउंसिलिंग सेवाओं की सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर की गई काउंसिलिंग, परिवार का सहयोग और शिक्षा से जुड़े रहने की प्रेरणा बच्चों के भविष्य को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई से अधिक पुनर्वास, संरक्षण और परामर्श पर जोर दिया जाता है, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

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