शिमला। हिमाचल प्रदेश की पंचायती व्यवस्था में रविवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव दर्ज किया गया। राज्य सरकार ने 84 नई ग्राम पंचायतों के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या बढ़कर 3704 हो गई है। पहले यह संख्या 3577 थी।

हिमाचल में 84 नई पंचायतों का गठन

इस निर्णय को ग्रामीण प्रशासन के ढांचे में महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से बढ़ती जनसंख्या, भौगोलिक विस्तार और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सुविधा की मांग के चलते पंचायतों के पुनर्गठन की जरूरत महसूस की जा रही थी।

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CM सुक्खू ने लगाई मुहर

CM सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष पंचायतीराज विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगी। विभाग ने कुल 110 नई पंचायतों के गठन का प्रस्ताव सरकार को सौंपा था, जिनमें से तीसरे चरण में 84 पंचायतों को मंजूरी प्रदान की गई है।

तीन चरणों में बढ़ी पंचायतों की संख्या

प्रदेश में पंचायत पुनर्गठन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है।

  • पहला चरण: 4 नई पंचायतों का गठन
  • दूसरा चरण: 39 पंचायतों का गठन (27 फरवरी को अधिसूचना जारी)
  • तीसरा चरण: 84 नई पंचायतों को मंजूरी

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127 नई पंचायतें बनी

इस प्रकार कुल 127 नई पंचायतें तीन चरणों में अस्तित्व में आ चुकी हैं। हालांकि दूसरे चरण में 40 पंचायतों का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन मंडी जिले की एक पंचायत के गठन को लेकर तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कुछ आपत्तियां सामने आईं, जिस कारण वह मामला फिलहाल लंबित बताया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी हलचल

नई पंचायतों के गठन की खबर सामने आते ही ग्रामीण क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है। जिन इलाकों को नई पंचायत का दर्जा मिला है, वहां लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्रतिनिधियों का मानना है कि छोटी प्रशासनिक इकाइयों के बनने से लोगों की सीधी भागीदारी बढ़ेगी और विकास योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।

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क्या होगा नई पंचायतों के गठन से?

कई गांव ऐसे थे जो भौगोलिक रूप से बड़े पंचायत क्षेत्रों में शामिल होने के कारण मुख्यालय से दूर पड़ते थे। इससे लोगों को प्रमाण पत्र, पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। अब नई पंचायत बनने से इन समस्याओं में राहत मिलने की उम्मीद है।

विकास योजनाओं को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायतों की संख्या बढ़ने से विकास योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। छोटे दायरे में प्रशासनिक नियंत्रण होने से निगरानी बेहतर होगी और पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

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ग्रामीणों के लिए अच्छी खबर

इसके अलावा मनरेगा, ग्रामीण आवास योजना, पेयजल, सड़क और स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों के संचालन में तेजी आने की संभावना है। स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना अब अपेक्षाकृत आसान होगा।

नई पंचायतों से जागी कई उम्मीदें

पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नए पंचायत क्षेत्रों के निर्धारण में जनसंख्या मानक, भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सीमाएं और ग्रामीणों की सहमति जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। पुनर्गठन की प्रक्रिया में आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए थे, जिनका परीक्षण करने के बाद अंतिम निर्णय लिया गया।

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31 मई से पहले चुनाव

प्रदेश सरकार का मानना है कि यह कदम जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। आने वाले समय में अगर जरूरत पड़ी तो शेष प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार को 31 मई से पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव संपन्न कराने हैं। इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

तीन चरणों में होगा चुनाव

प्रदेश में पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव तीन अलग-अलग चरणों में करवाने की तैयारी है। चुनावी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। फिलहाल, 3704 पंचायतों के साथ हिमाचल प्रदेश की पंचायती व्यवस्था पहले से अधिक विस्तृत और सशक्त स्वरूप में सामने आई है, जिससे ग्रामीण विकास की गति को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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