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May 31, 2026
हिमाचल: वोट डाल लौटी 90 वर्षीय दादी की थमी सांसें, शाम को पोता बन गया प्रधान; नहीं मना पाई जीत की खुशी
बूथ पर वोट डाल घर लौटी दादी की थम गईं सांसें, शाम को पोता बना पंचायत प्रधान
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई है, जिसने पंचायत चुनावों की हलचल के बीच हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। लोकतंत्र के इस पर्व में अपने मताधिकार का उपयोग करने पहुंची 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने प्रधान पद का चुनाव लड़ रहे अपने पोते के समर्थन में वोट डाला, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मतदान के कुछ घंटों बाद ही उनका निधन हो गया और शाम को जब चुनाव परिणाम आए तो उनका पोता प्रधान पद का चुनाव जीत चुका था। हालांकि उसे अपनी जीत की सबसे बड़ी शुभचिंतक दादी का आशीर्वाद और बधाई नसीब नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार मंडी जिला की कोट ढलियास पंचायत निवासी 90 वर्षीय गुड्डी देवी शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद 30 मई को सुबह करीब 11 बजे अपने मताधिकार का प्रयोग करने रोपा मतदान केंद्र पहुंचीं। प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे अपने पोते दिनेश कुमार के पक्ष में मतदान करने के लिए उन्होंने वाहन और पैदल यात्रा का सफर तय किया। मतदान करने के बाद वह सकुशल घर लौट आईं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और हृदयाघात के कारण उनका निधन हो गया।
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घर पहुंचने के बाद अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। परिजनों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया, लेकिन कुछ ही देर में उन्हें हृदयाघात आ गया। परिवार के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही गुड्डी देवी ने अंतिम सांस ले ली। इस घटना से पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। जिस घर में चुनाव परिणामों की प्रतीक्षा हो रही थी, वहां अचानक मातम का माहौल बन गया। परिजन दादी के निधन से गहरे सदमे में थे।
चुनाव परिणामों में गुड्डी देवी के पोते दिनेश कुमार ने 535 मत प्राप्त कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 199 मतों के बड़े अंतर से शिकस्त दी और प्रधान पद पर शानदार विजय हासिल की। अफसोस इस बात का रहा कि पोता तो प्रधान बन गया, लेकिन उसकी इस ऐतिहासिक जीत पर बलैयां लेने वाली और सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने वाली दादी अब इस दुनिया में नहीं थीं। इस भारी दुख के कारण परिवार में जीत की खुशी मातम में बदल गई और दिनेश अपनी इस बड़ी जीत का कोई जश्न नहीं मना सके।
आमतौर पर चुनाव जीतने के बाद समर्थकों में उत्सव का माहौल देखने को मिलता है, लेकिन दिनेश कुमार के घर का दृश्य बिल्कुल अलग था। जीत की खुशी होने के बावजूद परिवार दादी के निधन के गम में डूबा रहा। पोते ने भी अपनी जीत का कोई जश्न नहीं मनाया और परिवार के साथ शोक में शामिल रहा।
परिजनों के अनुसार गुड्डी देवी केवल अपने पोते की जीत ही नहीं, बल्कि पंचायत में उप प्रधान पद के एक अन्य उम्मीदवार श्याम लाल की सफलता भी देखना चाहती थीं। बताया जा रहा है कि श्याम लाल पूर्व में कई बार चुनाव हार चुके थे। इस बार चुनाव परिणामों में उन्हें भी जीत मिली। परिवार का कहना है कि यह भी गुड्डी देवी की इच्छा थीए जो आखिरकार पूरी हो गई।
कोट ढलियास पंचायत में यह घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर लोकतंत्र के प्रति एक बुजुर्ग महिला की जागरूकता और अपने मताधिकार के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल सामने आई, वहीं दूसरी ओर पोते की जीत से कुछ घंटे पहले उनका निधन होने की घटना ने हर किसी को भावुक कर दिया। गांव के लोगों का कहना है कि गुड्डी देवी ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में भी मतदान के महत्व को समझा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया। उनका अंतिम मतदान और उसी दिन उनके पोते की जीत अब पंचायत के इतिहास की एक भावनात्मक याद बन गई है।