#विविध
May 31, 2026
हिमाचल: वोटिंग की चिंता छोड़ सिलेंडर की लाइन में लगा उम्मीदवार, ग्रामीण भी मतदान केंद्र से भागे
सिलेंडर की गाड़ी देख चुनाव भूल गया हर कोई
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में शनिवार को पंचायत चुनाव के दौरान एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। इस घटना ने मतदान केंद्र के गंभीर माहौल को कुछ देर के लिए हल्का-फुल्का और मनोरंजक बना दिया।
आमतौर पर चुनावी दिन मतदान केंद्रों पर राजनीतिक चर्चाएं, प्रत्याशियों की गतिविधियां और मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। मगर ग्राम पंचायत फूलपुर में अचानक पहुंची गैस सिलेंडर की गाड़ी ने पूरा दृश्य ही बदल दिया।
दोपहर करीब 12 बजे मतदान केंद्र पर मतदाताओं की लंबी कतार लगी हुई थी। तेज धूप के बावजूद लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे ताकि लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
इसी दौरान गांव में गैस सिलेंडर वितरण करने वाली गाड़ी पहुंच गई। गाड़ी के हॉर्न की आवाज सुनते ही कई लोगों का ध्यान मतदान केंद्र से हटकर सीधे गैस वितरण स्थल की ओर चला गया।
देखते ही देखते कतार में खड़े कई मतदाता अपना नंबर छोड़कर घरों की ओर दौड़ पड़े। कुछ ही मिनटों में वे खाली सिलेंडर लेकर वापस लौटे और गैस गाड़ी के आसपास जमा हो गए। मतदान केंद्र के बाहर का नजारा अचानक बदल गया। जहां कुछ देर पहले वोट डालने की चर्चा हो रही थी। वहीं अब सिलेंडर लेने की जल्दी दिखाई देने लगी।
ग्रामीणों के अनुसार गैस की गाड़ी नियमित रूप से नहीं आती, इसलिए लोगों ने मौका हाथ से जाने नहीं दिया। कई ग्रामीण सिलेंडर लेने के लिए गाड़ी के आसपास जुट गए। कुछ लोग मतदान के बाद सिलेंडर लेने की योजना बना रहे थे, लेकिन गाड़ी को सामने देखकर उन्होंने प्राथमिकता बदल दी।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे रोचक पहलू तब सामने आया जब पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे एक उम्मीदवार भी हाथ में खाली सिलेंडर लेकर गैस गाड़ी के पास पहुंच गए। कुछ समय पहले तक जो उम्मीदवार मतदाताओं से मिल रहे थे और समर्थन मांग रहे थे। वही अब सिलिंडर हासिल करने की कोशिश में अन्य ग्रामीणों के साथ खड़े दिखाई दिए।

जब लोगों ने उनसे इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि घर से स्पष्ट निर्देश मिले हैं कि गैस सिलिंडर जरूर लेकर आना है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि चुनाव तो चलता रहेगा, लेकिन घर में खाना बनाने के लिए सिलेंडर होना भी जरूरी है। उनके इस जवाब पर आसपास मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे और माहौल में ठहाके गूंजने लगे।
करीब आधे से तीन-चौथाई घंटे तक पंचायत में मतदान और गैस वितरण का यह अनोखा दृश्य देखने को मिला। कुछ लोग वोट डालने के बाद सिलेंडर लेने पहुंचे तो कुछ पहले सिलिंडर लेकर फिर मतदान केंद्र की ओर लौटे। इस दौरान मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई, लेकिन लोगों के बीच यह चर्चा जरूर होती रही कि आखिर लोकतंत्र और रसोई के बीच किसे प्राथमिकता दी जाए।
लोगों ने बताया कि मतदान हर नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन गैस की गाड़ी का गांव में पहुंचना भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता। उन्होंने कहा कि गैस वितरण का अवसर चूक जाने पर कई दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है, इसलिए लोगों ने दोनों जिम्मेदारियों को साथ-साथ निभाने की कोशिश की।