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May 31, 2026
हिमाचल पंचायत चुनाव में पिता-पुत्री का कमाल, दोनों एक साथ बने प्रधान; बना दिया रिकॉर्ड
जयराम की गृह पंचायत की प्रधान बनी बेटी, पिता लेह थाच पंचायत से बने प्रधान
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की सराजघाटी ने इस बार पंचायत चुनावों में एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। चुनावी नतीजों के बीच एक ही परिवार से जुड़ी ऐसी सफलता सामने आई है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां पिता और पुत्री दोनों ने अलग-अलग पंचायतों से प्रधान पद का चुनाव जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
पंचायत चुनावों में अक्सर परिवार के कई सदस्य राजनीति में सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन एक ही चुनाव में पिता और पुत्री का अलग-अलग पंचायतों से प्रधान चुना जाना बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। यही कारण है कि सराजघाटी में यह जीत चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
सराजघाटी क्षेत्र के निवासी फतेह सिंह ने लेह थाच पंचायत से प्रधान पद के लिए चुनाव मैदान में उतरकर शानदार जीत हासिल की। उनकी जीत के बाद परिवार और समर्थकों में खुशी का माहौल था। लेकिन यह खुशी कुछ ही दिनों में दोगुनी हो गई, जब उनकी पुत्री मीनाक्षी ने भी नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह पंचायत मुरहाग से प्रधान पद का चुनाव जीत लिया। इस तरह पिता और पुत्री दोनों ने अलग-अलग पंचायतों में जनता का विश्वास जीतते हुए प्रधान पद की जिम्मेदारी अपने नाम कर ली।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सराजघाटी के चुनावी इतिहास में शायद पहली बार ऐसा देखने को मिला है, जब एक ही परिवार के पिता और पुत्री ने एक साथ दो अलग-अलग पंचायतों की कमान संभालने का अधिकार प्राप्त किया हो। पिता की जीत के बाद बेटी की सफलता ने इस उपलब्धि को और भी खास बना दिया। चुनाव परिणाम सामने आते ही पूरे क्षेत्र में इस अनोखी राजनीतिक उपलब्धि की चर्चा शुरू हो गई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल पारिवारिक पहचान की वजह से नहीं, बल्कि दोनों उम्मीदवारों के प्रति जनता के विश्वास का परिणाम है। मतदाताओं ने दोनों को अपने-अपने क्षेत्रों के विकास की जिम्मेदारी सौंपते हुए प्रधान पद तक पहुंचाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जनता ने काम करने की क्षमता और नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए दोनों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
मीनाक्षी की शादी मुरहाग पंचायत में हुई है, जबकि उनका मायका लेह थाच पंचायत में है। ऐसे में उनकी जीत का जश्न दोनों पंचायतों में देखने को मिला। एक ओर मायके में पिता की जीत की खुशी थी तो दूसरी ओर बेटी की सफलता ने ससुराल पक्ष में भी उत्साह का माहौल बना दिया। परिवार के लिए यह चुनाव किसी यादगार उत्सव से कम नहीं रहा, क्योंकि एक ही चुनावी दौर में परिवार के दो सदस्य प्रधान पद तक पहुंचने में सफल रहे।
प्रधान चुने जाने के बाद दोनों निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने अब अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों के विकास की चुनौती होगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि दोनों पंचायतों में विकास कार्यों को गति मिलेगी और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
पंचायत चुनावों में जीत और हार की कहानियां हर बार सामने आती हैं, लेकिन सराजघाटी की यह कहानी कुछ अलग है। एक ही परिवार के पिता और पुत्री का अलग-अलग पंचायतों में प्रधान चुना जाना न केवल एक अनोखी उपलब्धि है, बल्कि क्षेत्र की राजनीति में एक नया अध्याय भी जोड़ गया है। इस ऐतिहासिक जीत ने सराजघाटी को प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना दिया है और लोग इसे पंचायत चुनावों की सबसे दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानियों में से एक मान रहे हैं।