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May 31, 2026
मंडी नगर निगम में भाजपा की प्रचंड जीत : जयराम ठाकुर पर भरोसा कायम- कांग्रेस एक सीट पर सिमटी
पिछली बार भाजपा ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी
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मंडी। मंडी नगर निगम चुनाव के नतीजों ने हिमाचल की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। भाजपा ने नगर निगम की 14 में से 12 सीटों पर कब्जा जमाकर कांग्रेस का लगभग सूपड़ा साफ कर दिया है।
वहीं, कांग्रेस केवल एक सीट जीत पाई, जबकि एक सीट पर कांग्रेस की बागी उम्मीदवार अलकनंदा हांडा ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। यह परिणाम न केवल भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और टिकट वितरण को लेकर उठ रहे सवालों को भी और गहरा कर गया है।
मंडी नगर निगम में भाजपा ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित किया है। पिछली बार भाजपा ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार पार्टी ने 12 वार्डों में जीत हासिल कर अपना प्रदर्शन और बेहतर कर लिया। वार्ड दर वार्ड भाजपा उम्मीदवारों ने कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए स्पष्ट बढ़त बनाई।
पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर-1 खलियार की रही। यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर के भतीजे और पार्टी प्रत्याशी प्रवीण कुमार ठाकुर को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरीं अलकनंदा हांडा ने 719 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।
इस मुकाबले में भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रणबीर सिंह भी मैदान में थे, लेकिन वह भी जीत नहीं पाए। नतीजे ने साफ कर दिया कि खलियार में जनता ने दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों को नकारते हुए स्थानीय चेहरे पर भरोसा जताया।
वार्ड नंबर-4 नेला से कांग्रेस की नर्वदा देवी ने जीत दर्ज कर पार्टी का खाता खोला। यदि यह सीट भी कांग्रेस हार जाती तो नगर निगम में उसका पूरी तरह सफाया हो सकता था। वहीं अलकनंदा हांडा की जीत तकनीकी रूप से निर्दलीय खाते में गई है, हालांकि उनका राजनीतिक संबंध कांग्रेस से रहा है।
भाजपा ने पुरानी मंडी, पड्डल, मंगवाई, सनयार्ड, तल्याहड़, वार्ड-8, पैलेस-2, शुहड़ा, समखेतर, भगवाहन, थनेहड़ा और दौहंदी वार्डों में जीत दर्ज की। कई सीटों पर भाजपा ने बड़े अंतर से जीत हासिल की, जिससे पार्टी की संगठनात्मक मजबूती भी सामने आई।
मंडी नगर निगम के परिणाम कांग्रेस के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय बन गए हैं। एक ओर पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार खलियार में हार गया, दूसरी ओर बागी उम्मीदवार जीत गईं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि टिकट वितरण और स्थानीय नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया है।