सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में पंचायत चुनाव के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है। गिरिपार क्षेत्र के माशू पंचायत की नई नवेली बहू सुरेखा चौहान ने शादी के महज एक महीने के भीतर पंचायत प्रधान का चुनाव जीतकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

नई नवेली दुल्हन बनी प्रधान

हाथों की मेहंदी पूरी तरह फीकी भी नहीं पड़ी थी कि पंचायत की जनता ने उन्हें अपना प्रधान चुन लिया। 25 वर्षीय सुरेखा चौहान की शादी 20 अप्रैल को पांवटा साहिब में कोर्ट मैरिज के जरिए हुई थी।

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एक महीना पहले ही हुई थी शादी

शादी के कुछ दिन बाद ही उन्होंने पंचायत चुनाव में उतरने का फैसला लिया। ग्रामीणों ने भी शिक्षित और युवा बहू पर भरोसा जताते हुए उन्हें भारी समर्थन दिया। चुनाव परिणाम में सुरेखा करीब 98 मतों से विजयी रहीं।

जल शक्ति विभाग में पति

इस बार माशू पंचायत अनुसूचित महिला वर्ग के लिए आरक्षित थी। सुरेखा की पहचान इलाके में एक पढ़ी-लिखी और जागरूक युवती के रूप में की जाती है। उन्होंने इतिहास विषय में MA की पढ़ाई की है। वहीं उनके पति करण जल शक्ति विभाग में कार्यरत हैं। शादी के बाद अब यह युवा जोड़ी पूरे गिरिपार क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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मायके-ससुराल में खुशी

परिवार के लोगों के अनुसार शादी की खुशियां अभी घर में चल ही रही थीं कि प्रधान बनने की दूसरी बड़ी खुशी भी परिवार को मिल गई। दिलचस्प बात यह भी रही कि सुरेखा के मायके वाली पंचायत में इस बार चुनाव निर्विरोध हुए, जबकि ससुराल की पंचायत में उन्होंने चुनावी मैदान में उतरकर शानदार जीत हासिल की।

गांववालों ने जताया विश्वास

प्रधान बनने के बाद सुरेखा चौहान ने पंचायतवासियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लोगों ने उन पर जो भरोसा किया है, उसे वह ईमानदारी और मेहनत से निभाने का प्रयास करेंगी। उनका कहना है कि पंचायत के विकास, महिलाओं की भागीदारी और युवाओं के लिए बेहतर कार्य करना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

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सुरेखा के साथ पूरा गांव

गिरिपार क्षेत्र में सुरेखा की जीत को केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि बदलती सोच और महिलाओं के बढ़ते नेतृत्व के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। गांव के लोगों का मानना है कि शिक्षित युवतियों का पंचायत स्तर पर आगे आना समाज के लिए सकारात्मक संकेत है।

चुनाव को ध्यान में रखकर शादी

हालांकि, यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि शादी का समय पंचायत चुनाव को ध्यान में रखकर तय किया गया था या नहीं। मगर इतना जरूर है कि दोनों परिवारों के बीच रिश्ता पहले से तय था। पंचायत चुनाव के दौरान यह शादी और फिर नई बहू की जीत पूरे इलाके में चर्चा का बड़ा विषय बन गई।

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