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July 12, 2026
महासू मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महायज्ञ शुरू, देव परंपरा के रंग में रंगा क्षेत्र- कई देवता पहुंचे
संधेड़ा रस्म के साथ महायज्ञ हुआ शुरू, जयकारों से गूंजा इलाका
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में शनिवार को भक्ति और देव संस्कृति के रंग में सराबोर रही। रोहड़ू उपमंडल की ग्राम पंचायत बशला में नवनिर्मित महासू देवता मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा महायज्ञ का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों और भव्य देव मिलन के साथ हुआ।
महासू देवता मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महायज्ञ की शुरुआत बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ हुई। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे देवताओं, देवलुओं और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा क्षेत्र श्रद्धा और आस्था के माहौल में डूब गया।
कार्यक्रम का सबसे विशेष और आकर्षक क्षण तब देखने को मिला, जब मंडलगढ़ के आराध्य देव बोंदरा महाराज और उत्तराखंड स्थित मुख्य महासू देव स्थली से पधारे देवता साहिब डोरिया महाराज का पारंपरिक देव मिलन हुआ। दोनों देवताओं के आमने-सामने आते ही पूरा परिसर "जय महासू देव" के जयकारों, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज से भक्तिमय हो उठा।
देवता महासू महाराज बशला की अगुवाई में मंदिर समिति ने सभी आमंत्रित देवताओं, देवलुओं और श्रद्धालुओं का पारंपरिक देव संस्कृति के अनुरूप गर्मजोशी से स्वागत किया। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ ने आयोजन की धार्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया।
महायज्ञ में शामिल होने के लिए नावर क्षेत्र सहित विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अढाल, बटाड़ी, मलखून तथा नावर क्षेत्र के देवता साहिब रुद्र महाराज की मंदिर समितियों को भी विशेष आमंत्रण दिया गया था। विभिन्न देवस्थलों से पहुंचे प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया।
मंदिर समिति ने महायज्ञ के दौरान पूरे आयोजन को सात्विक स्वरूप देने के उद्देश्य से मदिरा सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं से धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए आयोजन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। पूरे कार्यक्रम के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और वैदिक परंपराओं का विधिवत पालन किया गया।
महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। आयोजन स्थल पर पुलिस की विशेष टीम तैनात रही, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
ग्राम पंचायत बशला के प्रधान हैप्पी बनित मेहता ने बताया कि रविवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शिखा-पूजन की रस्म संपन्न कराई जाएगी। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें दूर-दराज से आने वाले सभी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
महायज्ञ के कारण पूरे गांव में दिनभर धार्मिक उत्साह बना रहा। रिश्तेदारों, श्रद्धालुओं और देव परंपरा से जुड़े लोगों की लगातार आवाजाही से गांव में मेले जैसा वातावरण देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति और सामाजिक एकता को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।