#विविध
July 11, 2026
हिमाचल तेजाब कांड : दोषियों को मिली कठोर सजा, हाईकोर्ट ने ठुकराई अर्जी
तेजाब हम.ले के परिणाम पीड़ित को जीवनभर झेलने पड़ते हैं
शेयर करें:

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तेजाब हमला मामले में दोषी ठहराए गए दो आरोपियों को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि तेजाब हमला केवल शारीरिक हिंसा नहीं, बल्कि किसी महिला की गरिमा, सम्मान और सामान्य जीवन जीने के अधिकार पर गंभीर और अमानवीय हमला होता है।
ऐसे मामलों में दोषसिद्धि के बाद सजा को निलंबित करने का निर्णय सामान्य परिस्थितियों में नहीं लिया जा सकता। यह फैसला न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सुनाया।
दोनों दोषियों ने निचली अदालत से मिली सजा पर रोक लगाने और अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित करने की मांग की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद उनकी याचिका खारिज कर दी।
मामला जिला कांगड़ा के जवाली क्षेत्र से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार वर्ष 2016 में एक संस्थान के परिसर में एक महिला पर तेजाब फेंककर गंभीर हमला किया गया था। इस हमले में पीड़िता को गंभीर शारीरिक और मानसिक क्षति पहुंची। मामले की जांच और सुनवाई पूरी होने के बाद धर्मशाला स्थित सत्र न्यायालय ने 29 नवंबर 2025 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था।
निचली अदालत ने BNS की धारा 326-A के तहत दोनों दोषियों को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने दोनों दोषियों को 50- 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही साक्ष्य मिटाने से जुड़े अपराध के लिए धारा 201 के तहत एक साल की अतिरिक्त कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई है।
सजा के खिलाफ अपील दायर करने के साथ ही दोषियों ने हाई कोर्ट से सजा निलंबित करने की भी मांग की। हालांकि, खंडपीठ ने इस आग्रह को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति के दोषी सिद्ध हो जाने के बाद कानून में उसे स्वतः निर्दोष मानने की धारणा समाप्त हो जाती है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : शादी के कुछ ही महीनों बाद पत्नी ने छोड़ा पति, 19 साल चला कोर्ट केस- अब मिला तलाक
ऐसे में सिर्फ अपील लंबित होने के आधार पर सजा पर रोक लगाना उचित नहीं माना जा सकता, विशेषकर तब जब मामला तेजाब हमले जैसे गंभीर अपराध से जुड़ा हो। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि तेजाब हमला एक ऐसा अपराध है, जिसके दुष्परिणाम पीड़ित को जीवनभर झेलने पड़ते हैं।
इससे न केवल शारीरिक क्षति होती है, बल्कि मानसिक आघात, सामाजिक चुनौतियां और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार भी प्रभावित होता है। इसलिए ऐसे मामलों में न्यायालयों को सजा निलंबित करने के अनुरोध पर अत्यंत सावधानी और कठोर मानकों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दोषियों के अधिकारों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि पीड़ित के अधिकारों और समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी बनाए रखना है। अदालत ने माना कि इस प्रकार के गंभीर अपराधों में न्यायिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है- ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके और समाज में ऐसे अपराधों के प्रति कड़ा संदेश जाए।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों दोषियों को फिलहाल निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा ही भुगतनी होगी। उनकी अपील पर अंतिम सुनवाई बाद में होगी, लेकिन तब तक सजा पर कोई रोक नहीं रहेगी।