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July 10, 2026

हिमाचल : शादी में अब नहीं आ सकेंगे 100 से ज्यादा बाराती, शराब-दहेज पर भी लगा बैन

मामा स्वागत भी होगा सीमित, फास्ट फूड पर भी लगी रोक

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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के ग्रामीणो ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। शिलाई उपमंडल के धारवा गांव ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया है- जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।

ग्रामीणों ने पेश की अनूठी मिसाल

बदलते समय के साथ शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में बढ़ते खर्च, दिखावे और आर्थिक प्रतिस्पर्धा को रोकने के उद्देश्य से ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण सामाजिक नियम लागू किए हैं। इन फैसलों का मकसद केवल खर्च कम करना नहीं, बल्कि समाज में समानता, सादगी और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करना भी है।

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6 जुलाई को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में गांव के बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और अन्य ग्रामीणों ने भाग लिया। लंबी चर्चा के बाद सभी ने एकमत से ऐसे नियम लागू करने का निर्णय लिया, जिनका पालन गांव के प्रत्येक परिवार को करना होगा।

शादी-विवाह में नहीं होगा दिखावा

ग्राम सभा ने स्पष्ट किया कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार को सामाजिक प्रतिष्ठा दिखाने का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में शादी समारोहों में अनावश्यक खर्च, भव्य आयोजन और दिखावे की होड़ तेजी से बढ़ी है- जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

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कमजोर परिवारों पर पड़ता है बोझ

इसी को देखते हुए गांव ने सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देने का फैसला लिया है- ताकि किसी भी परिवार को सामाजिक दबाव में आकर कर्ज लेने या अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने की आवश्यकता न पड़े।

शराब और नशे बैन

ग्राम सभा के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में विवाह समारोहों में शराब, बीयर और अन्य सभी प्रकार के नशे पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है। ग्रामीणों का मानना है कि कई बार नशे के कारण शादी समारोहों में विवाद, झगड़े और अप्रिय घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में नशामुक्त विवाह समारोह समाज के लिए बेहतर उदाहरण बनेंगे और पारिवारिक माहौल भी सौहार्दपूर्ण रहेगा।

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दहेज प्रथा के खिलाफ सख्त फैसला

गांव ने दहेज लेने और देने दोनों पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि दहेज सामाजिक बुराई है, जो आर्थिक असमानता और मानसिक तनाव को बढ़ावा देती है। ग्राम सभा का मानना है कि विवाह दो परिवारों का पवित्र रिश्ता है, इसे लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

महिलाओं के आभूषण भी किए गए सीमित

सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए ग्राम सभा ने महिलाओं के आभूषणों को भी सीमित करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि महंगे आभूषणों की होड़ भी सामाजिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाती है और कई परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालती है। ऐसे में अब विवाह समारोह में सिर्फ-

  • नाक की तिल्ली
  • कानों के झुमके
  • गले का मंगलसूत्र

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बारात में सिर्फ 15 वाहन, 100 बाराती

शादी समारोहों को सादगीपूर्ण बनाने के लिए बारात की संख्या भी निर्धारित कर दी गई है। इससे अनावश्यक भीड़, यातायात की समस्या और अतिरिक्त खर्च को कम करने में मदद मिलेगी। ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार-

  • बारात में अधिकतम 15 वाहन ही शामिल होंगे।
  • कुल 100 बाराती ही विवाह समारोह में जा सकेंगे।

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मामा स्वागत भी होगा सीमित

ग्राम सभा ने पारंपरिक मामा स्वागत कार्यक्रम को भी सीमित करने का निर्णय लिया है। अब इस अवसर पर केवल शाकाहारी भोजन परोसा जाएगा और परिवार के सीमित सदस्य ही इस आयोजन में शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सामाजिक परंपराओं को बनाए रखते हुए अनावश्यक खर्च को रोकना है।

फास्ट फूड पर भी लगी रोक

ग्रामीणों ने विवाह समारोहों में फास्ट फूड पर भी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा कुछ स्थानीय पारंपरिक आयोजनों के लिए भी विशेष नियम बनाए गए हैं-

  • लकड़ी की दलाई में दूल्हे पक्ष को भोजन।
  • पटलोज में केवल पांच लोगों की भागीदारी।
  • बच्चे के जन्म पर आयोजित होने वाले सोईताटू कार्यक्रम में केवल पांच या सात लोग ही शामिल होंगे।

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नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

ग्राम सभा ने यह भी तय किया है कि अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सामाजिक कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित नियमों के अनुसार-

  • 50 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा।
  • पूरे गांव को बकरे का भोज दंड स्वरूप देना होगा।
  • ऐसे परिवार के विवाह समारोह में गांव का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं होगा।

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समाज के लिए बन सकता है उदाहरण

धारवा गांव का यह निर्णय केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। बढ़ती महंगाई और सामाजिक प्रतिस्पर्धा के दौर में इस तरह के निर्णय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत दे सकते हैं और समाज में सादगी की संस्कृति को मजबूत कर सकते हैं।

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