#विविध
July 11, 2026
हिमाचल : ट्रेवल कंपनी ने रद्द किया 600 रुपये का टिकट, अब यात्री को मिलेगा 10 हजार मुआवजा
मजबूरी में लेना पड़ा हवाई सफर
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कांगड़ा। ऑनलाइन बस टिकट बुकिंग करने वाले यात्रियों के अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सुनाया है। यात्रा शुरू होने से महज 17 मिनट पहले कन्फर्म टिकट रद्द करने के मामले में आयोग ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म रेडबस और संबंधित बस ऑपरेटर को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए यात्री को 10 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है।
दरअसल, मामला वर्ष 2023 का है। पालमपुर निवासी जयंत पटियाल ने 5 अक्टूबर 2023 को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म रेडबस के माध्यम से भरमानी ट्रैवल्स की बस में पालमपुर से दिल्ली जाने के लिए टिकट बुक कराया था। उन्होंने टिकट के लिए 600 रुपये का भुगतान किया और बुकिंग भी पूरी तरह कन्फर्म दिखाई गई।
निर्धारित समय के अनुसार बस रात 10:15 बजे रवाना होनी थी और अगले दिन सुबह दिल्ली पहुंचना था। यात्री समय से पहले निर्धारित बोर्डिंग प्वाइंट पर पहुंच गया। जब बस के बारे में जानकारी लेने के लिए ऑपरेटर से संपर्क किया गया तो पता चला कि उस रूट की आखिरी बस पहले ही रवाना हो चुकी है। इसी बीच यात्रा शुरू होने से मात्र 17 मिनट पहले टिकट रद्द होने की सूचना भी मिल गई। अचानक हुई इस घटना से यात्री असमंजस में पड़ गया।
दिल्ली पहुंचना जरूरी होने के कारण जयंत पटियाल के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। उन्हें तत्काल अधिक कीमत देकर फ्लाइट की टिकट बुक करनी पड़ी। इससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की पीठ ने की।
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म केवल टिकट बेचकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते। यदि कोई सेवा उपलब्ध नहीं है तो उसकी सही जानकारी समय पर देना और उपभोक्ता को अनावश्यक परेशानी से बचाना संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी है। आयोग ने यह भी माना कि ऐसी बस सेवा का टिकट उपलब्ध कराना, जो वास्तविक रूप से संचालित नहीं हो रही थी, उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार और सेवा में स्पष्ट कमी का मामला है।
आयोग ने रेडबस लिमिटेड और भरमानी ट्रैवल्स को संयुक्त रूप से आदेश दिया कि वे शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये मुआवजे के साथ मुकदमे का खर्च भी अदा करें। आयोग का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से यात्रियों का समय, पैसा और भरोसा तीनों प्रभावित होते हैं, इसलिए कंपनियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
यह फैसला ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म और ट्रैवल ऑपरेटरों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि वे उपभोक्ताओं को सही और समय पर जानकारी उपलब्ध कराएं। यदि उनकी लापरवाही के कारण यात्रियों को आर्थिक या मानसिक नुकसान होता है तो उन्हें उसकी जिम्मेदारी भी उठानी होगी।