#विविध
July 11, 2026
हिमाचल में बारिश बनी आफत, ताश के पत्तों की तरह गिरा पुल- मकानों पर मंडराया खतरा
परिवार ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
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शिमला/किन्नौर। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश अब लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। किन्नौर से लेकर राजधानी शिमला तक कई जगह भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। कहीं पुल ढह गया तो कहीं घरों और सड़कों पर मलबा आ गया। राहत की बात यह रही कि इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन कई इलाकों में लोगों के सामने बड़ा खतरा खड़ा हो गया है।
शनिवार दिन के समय लगातार बारिश के कारण पुल के नीचे की जमीन धंस गई थी। इससे पूरा पुल हवा में लटक गया था। प्रशासन और स्थानीय लोग हालात पर नजर रखे हुए थे, लेकिन देर शाम तक जमीन और खिसक गई और पुल अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर पड़ा।
यह पुल सांगला घाटी की लाइफलाइन माना जाता था। पुल टूटने के बाद आसपास के कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। अब लोगों को जरूरी सामान पहुंचाने और आवाजाही में दिक्कत आने की आशंका है। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
वहीं, राजधानी शिमला के संजौली स्थित विशाल मार्ट के पीछे शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर यशपाल के घर के ऊपर आ गिरे। उस समय घर में परिवार के दो युवक मौजूद थे, जिन्होंने समय रहते बाहर भागकर अपनी जान बचा ली।
परिवार का कहना है कि घटना के तुरंत बाद प्रशासन को सूचना दे दी गई थी, लेकिन देर शाम तक न तो कोई राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचा और न ही मलबा हटाने का काम शुरू हुआ। लगातार मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है, जिससे परिवार और आसपास रहने वाले लोग डरे हुए हैं।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से जल्द से जल्द मलबा हटाने और पहाड़ी को सुरक्षित करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आगे कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रदेश में मानसून सक्रिय होने के बाद भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में लोगों ने प्रशासन से संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
शनिवार तड़के करीब चार बजे शिमला के संजौली कॉलेज के पास बोथवेल इलाके में एक बार फिर भारी भूस्खलन हुआ। घटना के समय ज्यादातर लोग अपने घरों में सो रहे थे। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन कई मकानों पर खतरा मंडराने लगा है।
भूस्खलन के कारण सड़क के नीचे का हिस्सा ढह गया और मलबा नीचे बने मकानों की ओर आ गया। मकानों तक जाने वाला रास्ता भी बीच से टूट गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब तीन से चार इमारतें खतरे की जद में हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी जगह 28 जून 2025 को भी भारी भूस्खलन हुआ था। उस समय मलबा और बड़ी चट्टानें सीधे घरों में घुस गई थीं, जिससे कई बच्चे और महिलाएं फंस गए थे। अब फिर उसी इलाके में भूस्खलन होने से लोगों में डर का माहौल है।
लगातार बारिश के कारण शनिवार को राजहाना मोहल में भी पहाड़ी से भूस्खलन हो गया। भारी मात्रा में पत्थर, बोल्डर और मलबा सड़क किनारे आ गिरा।
घटना के समय सड़क किनारे खड़े दो वाहन मलबे की चपेट में आ गए। दोनों गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और आंशिक रूप से मलबे में दब गईं। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम में पहाड़ी इलाकों में अनावश्यक यात्रा न करने और पूरी सावधानी बरतने की अपील की है। मौसम विभाग की चेतावनी के बीच लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।