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July 11, 2026
हिमाचल : शादी के कुछ ही महीनों बाद पत्नी ने छोड़ा पति, 19 साल चला कोर्ट केस- अब मिला तलाक
फैमिली कोर्ट ने पति को दी तलाक की डिक्री
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा में स्थित फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने लंबे समय से अलग रह रहे एक दंपती के वैवाहिक संबंध को कानूनी रूप से समाप्त करते हुए पति के पक्ष में तलाक का फैसला सुनाया है।
अदालत ने अपने निर्णय में माना कि पति-पत्नी के बीच वर्षों से वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। दोनों के दोबारा साथ रहने की कोई वास्तविक संभावना दिखाई नहीं देती। ऐसे में विवाह को जारी रखना न्यायोचित नहीं होगा।
मामले की सुनवाई एडिशनल प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट, देहरा सपना पांडेय की अदालत में हुई। अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत पति की ओर से दायर याचिका स्वीकार करते हुए क्रूरता और परित्याग (डेजर्शन) को तलाक का पर्याप्त आधार माना और विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार दोनों का विवाह वर्ष 2007 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था। शादी के बाद दंपती की कोई संतान नहीं हुई। पति ने अदालत में दायर याचिका में बताया कि विवाह के शुरुआती समय के बाद पत्नी के व्यवहार में बदलाव आने लगा।
उसका आरोप था कि पत्नी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उचित व्यवहार नहीं करती थी, घरेलू जिम्मेदारियों से दूरी बनाकर रखती थी और कई बार बिना किसी सूचना के घर छोड़कर चली जाती थी।
याचिका के अनुसार वर्ष 2010 में पत्नी घर छोड़कर चली गई और इसके बाद उसने पति के साथ दोबारा रहने से भी इनकार कर दिया। पति का कहना था कि वैवाहिक जीवन को बचाने के लिए परिवार और पंचायत स्तर पर कई बार समझौते की कोशिशें की गईं, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल सका। लगातार अलगाव की स्थिति बने रहने के बाद उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया। हालांकि, पत्नी नियमित रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुई। लगातार अनुपस्थिति के कारण मामले की सुनवाई एकतरफा (एक्स-पार्टी) आगे बढ़ी। अदालत ने पति की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले का निर्णय सुनाया।
फैसले में अदालत ने कहा कि पति द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जबकि दूसरी ओर पत्नी की ओर से इन आरोपों का कोई प्रभावी प्रतिवाद या खंडन नहीं किया गया। अदालत ने यह भी माना कि वर्ष 2010 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं और इतने लंबे समय के अलगाव के बाद वैवाहिक संबंधों के सामान्य होने की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने विवाह को समाप्त करने का आदेश जारी किया और पति को तलाक की कानूनी मंजूरी प्रदान कर दी। यह फैसला इस बात को भी रेखांकित करता है कि लंबे समय तक चले अलगाव, वैवाहिक संबंधों के पूरी तरह टूट जाने और पर्याप्त साक्ष्यों की उपलब्धता की स्थिति में न्यायालय प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय देता है।