#विविध
July 12, 2026
हिमाचल में नया नियम : अब ग्रामीणों को भी देना होगा कचरा TAX, हर महीना वसूल होंगे 3 हजार
ग्रामसभा तय करेगी पंचायतों में शुल्क लागू करने की प्रक्रिया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्र के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 'यूजर चार्ज' वसूलेंगी।
इस संबंध में मॉडल उप नियम-2026 के तहत विकास खंड देहरा के BDO ने सभी पंचायत सचिवों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। एकत्रित राशि का उपयोग केवल स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा।
आपको बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायतों को यूजर चार्ज वसूलने की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले परिवारों, दुकानों, संस्थानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निर्धारित मासिक शुल्क एकत्र करेगी।
जारी निर्देशों के अनुसार पंचायत सचिवों को इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पंचायत सचिव जवाबदेह होंगे।
जिन पंचायतों में अभी तक यूजर चार्ज निर्धारित नहीं किया गया है, वहां ग्रामसभा अथवा पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित कर शुल्क को स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद पंचायतें अपने क्षेत्र के सभी परिवारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वे कर उनकी सूची तैयार करेंगी, ताकि नियमित रूप से शुल्क की वसूली की जा सके।
निर्देशों के अनुसार प्रत्येक पंचायत को यूजर चार्ज की राशि जमा करने के लिए अलग बैंक खाता खोलना होगा। वसूली गई राशि को अगले कार्य दिवस में इस खाते में जमा कराना अनिवार्य रहेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस राशि का उपयोग किसी अन्य मद में नहीं किया जा सकेगा। एकत्रित धन केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, गांवों की साफ-सफाई, कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने, सफाई मित्रों के मानदेय तथा स्वच्छता से जुड़े अन्य कार्यों पर ही खर्च किया जाएगा। पंचायत सचिव संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जसरोटिया ने भी पुष्टि की है कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग मासिक शुल्क निर्धारित किया गया है। जैसे कि-
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को बढ़ावा मिलेगा। पंचायतों के पास स्वच्छता कार्यों के लिए नियमित वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे गांवों में साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।