कांगड़ा। वीरभूमि हिमाचल दो दिनों में अपना दूसरा वीर जवान खो दिया है। बीते मंगलवार को जहां उपमंडल जवाली के बेही पठियार पंचायत के 20 वर्षीय अग्निवीर जवान अमनीत की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वहीं, कल नूरपुर क्षेत्र के सदवां गांव का 22 वर्षीय जवान जतिन धीमान का निधन हो गया।

हिमाचल ने खोया एक और जवान

BSF में अपनी सेवाएं दे रहा यह होनहार बेटा कमांडो ट्रेनिंग के अंतिम चरण में था। परिवार और गांव वाले उस दिन का इंतजार कर रहे थे जब ट्रेनिंग पूरी कर वह और मजबूती के साथ देश की सरहदों की रक्षा के लिए तैनात होता, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

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दिल का दौरा पड़ने से मौत

अचानक दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, सदवां ही नहीं बल्कि आसपास के पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जवान उम्र में बेटे के यूं चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।।

सदमे में पूरा परिवार

माता-पिता की आंखों में जहां गर्व था कि उनका बेटा देश की सेवा कर रहा है, वहीं अब वही आंखें अपार शोक से भरी हुई थीं। जतिन बचपन से ही फौजी वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना देखता था। कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर उसने BSF में जगह बनाई और कमांडो ट्रेनिंग तक पहुंचा।

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कमांडो बनने का सपना अधूरा

बताया जा रहा है कि ट्रेनिंग पूरी होने में बहुत कम समय शेष था। साथी जवानों के अनुसार वह शारीरिक रूप से फिट और उत्साही था, जिससे किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अचानक ऐसा हादसा हो जाएगा।

पार्थिव देह पहुंचते ही गूंजे नारे

जब जतिन की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटी अपने गृह क्षेत्र पहुंची तो माहौल गमगीन हो उठा। युवाओं ने दर्जनों वाहनों का काफिला बनाकर उसे गांव तक सम्मानपूर्वक पहुंचाया। रास्ते भर “शहीद जतिन धीमान अमर रहे” और “भारत माता की जय” के नारे गूंजते रहे।

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तिरंगे में लिपटा पहुंचा घर

गांव की गलियों में जैसे ही तिरंगे में लिपटा बेटा पहुंचा, हर आंख नम हो गई। बुजुर्गों ने सिर झुकाकर श्रद्धांजलि दी, महिलाओं ने रोते हुए अंतिम दर्शन किए और युवाओं ने अपने साथी को कंधा देकर अंतिम यात्रा में भाग लिया।

अंतिम यात्रा में शामिल हुए सैंकडों लोग

इस दुखद घड़ी में कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी परिवार के साथ खड़े नजर आए। पूर्व मंत्री राकेश पठानिया, विधायक रणवीर सिंह निक्का, पूर्व विधायक अजय महाजन, एसडीएम अरुण शर्मा सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सभी ने परिवार को ढांढस बंधाया और जतिन के जज्बे व समर्पण को नमन किया।

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पूरे क्षेत्र में शोक की लहर

जतिन की असमय मृत्यु ने पूरे नूरपुर क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय युवाओं में खासा दुख देखा गया, क्योंकि वह उनके लिए प्रेरणा का स्रोत था। गांव के लोगों का कहना है कि भले ही जतिन अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका देशभक्ति का जज्बा और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

एक ओर परिवार का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, वहीं दूसरी ओर पूरे क्षेत्र को अपने इस वीर बेटे पर गर्व भी है। सदवां का यह लाल अब इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगा।

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