#अपराध
February 25, 2026
हिमाचल में बच्चा तस्करी: IVF क्लीनिक व NGO से जुड़े तार, अस्पतालों पर भी शक- अब तक 9 अरेस्ट
देहरा से पंजाब-हरियाणा तक फैला नवजात सौदेबाजी का जाल
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के देहरा पुलिस जिला ने एक संगठित अंतरराज्यीय नवजात शिशु तस्करी एवं धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश कर सनसनी फैला दी है। इस मामले में अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है- जिनमें 7 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं।
सोमवार को पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों से 6 आरोपियों को दबोचा गया और अदालत में पेश किया गया। गिरफ्तार महिलाओं में एक की आयु करीब 60 वर्ष बताई जा रही है, जिससे स्पष्ट है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय और सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था।
मामले की शुरुआत 17 फरवरी को पुलिस थाना संसारपुर टैरेस में दर्ज एक शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नवजात शिशु गोद दिलाने के नाम पर उससे ₹23,500 की ठगी की गई।
शुरुआती जांच में यह मामला साधारण धोखाधड़ी का लग रहा था। मगर जब साइबर सेल देहरा ने तकनीकी विश्लेषण शुरू किया तो कई संदिग्ध नंबरों और लेन-देन की कड़ियां सामने आईं। जांच की दिशा बदलते ही पुलिस को अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले और इसके बाद कार्रवाई तेज कर दी गई।
तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी दीपक आनंद (40) निवासी कांगड़ा, को जालंधर (पंजाब) से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।दीपक आनंद गिरोह का मुख्य एजेंट बताया जा रहा है, जो निसंतान दंपतियों को पंजाब-हरियाणा स्थित नेटवर्क से जोड़ता था और सौदे तय करवाता था। उसके माध्यम से पुलिस ने मनिंद्रजीत कौर उर्फ रितु (47) निवासी बटाला और अनीता उर्फ आशा (59) निवासी जालंधर (पंजाब) को भी गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के तहत एक नाबालिग नवजात शिशु की अवैध खरीद-फरोख्त की गई थी, जिसमें लगभग ₹4.85 लाख का लेन-देन हुआ। पुलिस ने शिशु को सकुशल बरामद कर लिया है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेशानुसार बच्चे को स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी को सौंप दिया गया है। यह खुलासा समाज के लिए बेहद चिंताजनक है कि संवेदनशील मानवीय भावनाओं जैसे संतान की चाह को अपराध का माध्यम बनाया जा रहा था।
सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया कि गिरफ्तार महिलाओं में से कई का संबंध IVF क्लीनिकों और NGO से रहा है। इन्हीं माध्यमों से गिरोह को यह जानकारी मिलती थी कि कौन-सा दंपति संतान के लिए परेशान है।

कौन-सी महिला आर्थिक या सामाजिक दबाव में नवजात को सौंपने की स्थिति में है। इस संवेदनशील जानकारी का दुरुपयोग कर गिरोह अवैध सौदे कर रहा था। पुलिस को शक है कि कुछ अस्पतालों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
यह पूरा नेटवर्क पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों जालंधर, बठिंडा, मानसा और सिरसा तक फैला हुआ था। पुलिस जांच के अनुसार गिरोह में भूमिकाएं स्पष्ट रूप से बंटी हुई थीं-
पिछले एक सप्ताह से पुलिस जिला देहरा की संसारपुर टैरेस थाना टीम ने पंजाब और हरियाणा में लगातार दबिश दी। सोमवार को जिन छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, उनकी पहचान-

SP देहरा मयंक चौधरी ने बताया कि यह केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय शिशु तस्करी नेटवर्क का मामला है। इसमें और भी लोगों की संलिप्तता की आशंका है। सभी कड़ियों को जोड़कर जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या अन्य राज्यों में भी इसी तरह के सौदे हुए हैं।
यह मामला एक गंभीर सामाजिक चेतावनी है। निसंतान दंपतियों की भावनाओं और असहाय माताओं की मजबूरी का फायदा उठाकर अवैध कारोबार चलाया जा रहा था। कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया स्पष्ट और सुरक्षित है, लेकिन शॉर्टकट अपनाने की प्रवृत्ति ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है।
देहरा पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े नेटवर्क को उजागर किया है, लेकिन साथ ही यह भी दिखाया है कि समाज को सतर्क रहने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की कितनी आवश्यकता है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।