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July 7, 2026

एंट्री टैक्स पर हिमाचल सरकार के खिलाफ नारेबाजी, पक्का मोर्चा लगाने के मूड में पंजाब के संगठन

26 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान

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Himachal Entry Tax

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में दूसरे राज्यों के वाहनों से लिए जा रहे एंट्री टैक्स को लेकर एक बार फिर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। पंजाब के कई किसान संगठनों, टैक्सी यूनियनों और निहंग सिंह जत्थेबंदियों ने इस टैक्स का विरोध तेज कर दिया है। उनका कहना है कि सीमावर्ती जिलों के लोगों पर यह टैक्स बोझ बन रहा है और इसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए।

26 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान

आंदोलनकारी संगठनों ने घोषणा की है कि 26 जुलाई से  घनौली-नालागढ़ स्टेट हाईवे पर स्थित ढेरोंवाल एंट्री टोल नाके पर अनिश्चितकालीन पक्का मोर्चा लगाया जाएगा। नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके लिए बड़ी संख्या में किसान, टैक्सी चालक और अन्य लोग धरने में शामिल होंगे।

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पंजाब में प्रदर्शन, हिमाचल सरकार के खिलाफ नारेबाजी

आंदोलन की शुरुआत पंजाब के नूरपुर बेदी के पुराने बस स्टैंड चौक से हुई, जहां विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हिमाचल सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और एंट्री टैक्स को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई। नेताओं का कहना है कि यह टैक्स रोजाना आने-जाने वाले लोगों और व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।

कई किसान संगठन और टैक्सी यूनियन हुईं एकजुट

इस प्रदर्शन में पंजाब मोर्चा, किरती किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन (बहरामके), आजाद टैक्सी यूनियन, नूरपुर बेदी टैक्सी यूनियन और निहंग सिंह जत्थेबंदियों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी संगठनों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आंदोलन को और मजबूत करने का फैसला लिया।

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सीमावर्ती जिलों को टैक्स से छूट देने की मांग

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने कहा कि रूपनगर, मोहाली, पठानकोट और होशियारपुर जैसे पंजाब के सीमावर्ती जिलों के लोगों को हिमाचल एंट्री टैक्स से पूरी तरह छूट दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि इन इलाकों के लोग रोजमर्रा के काम, व्यापार, इलाज और अन्य जरूरी कारणों से हिमाचल आते-जाते हैं, ऐसे में उन पर एंट्री टैक्स लगाना उचित नहीं है।

मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन होगा और तेज

आंदोलनकारी नेताओं ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो 26 जुलाई से शुरू होने वाला धरना लंबे समय तक जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। फिलहाल सभी की नजर हिमाचल सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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