रामपुर, (शिमला)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का रामपुर के दुर्गम काशापाट का दौरा कई मायनों में खास रहा। ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री ने काशापाट के ग्रामीणों के बीच पहुंचकर न केवल उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि रात भी ग्रामीण के घर बिताई। इस दौरान मुख्यमंत्री का अंदाज किसी औपचारिक सरकारी दौरे से अलग नजर आया। लोक वाद्य यंत्रों की गूंज, पारंपरिक परिधान, पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू और ग्रामीणों के साथ नाटी ने पूरे माहौल को हिमाचली रंग में रंग दिया।
जब गांव के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री
काशापाट पहुंचने पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया। स्थानीय बजंतरियों ने लोक वाद्य यंत्रों के साथ उनका अभिनंदन किया, जबकि महिलाओं ने प्राकृतिक फूलों और लोसरू से तैयार मालाओं के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
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महिलाएं पारंपरिक हिमाचली परिधान में नजर आईं। ग्रामीणों की ओर से मुख्यमंत्री को ऊन से तैयार छुपटा, ऊनी पजामा, टोपी और गाची पहनाकर सम्मानित किया गया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र की लोक परंपराओं को इतने करीब से देखकर मुख्यमंत्री भी ग्रामीणों के साथ सहजता से घुलते-मिलते नजर आए।
मुख्यमंत्री के लिए महिलाओं ने खुद तैयार किया पहाड़ी भोज
काशापाट की महिलाओं ने मुख्यमंत्री की मेहमाननवाजी में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके लिए खास तौर पर स्थानीय अनाज और पारंपरिक विधि से पहाड़ी व्यंजन तैयार किए गए। मुख्यमंत्री के भोजन में कोदे और फाफरे के चिलड़े, दाल, सब्जी और अन्य स्थानीय पकवान शामिल रहे। सुबह के नाश्ते में भी स्थानीय स्वाद को प्राथमिकता दी गई और तुलसी तथा कोदे के चिलटू समेत पारंपरिक व्यंजन परोसे गए।
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यह सिर्फ मुख्यमंत्री के लिए तैयार किया गया खाना नहीं था, बल्कि काशापाट की महिलाओं ने अपनी रसोई के जरिए अपने क्षेत्र की सदियों पुरानी खान-पान की परंपरा और स्थानीय मोटे अनाज की पहचान को सामने रखा।
जब मुर्गाकांड से सुर्खियों में आए थे सुक्खू, अब जमीनी सादगी से जीता दिल
राजनीतिक गलियारों और जनता के बीच मुख्यमंत्री सुक्खू का यह सादगी भरा अंदाज उनके पुराने दिनों की याद भी दिलाता है। गौर हो कि इससे पूर्व मुख्यमंत्री उस वक्त काफी चर्चाओं में आए थे, जब रामपुर क्षेत्र के ही एक कार्यक्रम के दौरान उनके काफिले के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया मुर्गा (चिकन) गलती से सुरक्षाकर्मियों/अधिकारियों के अमले में बंट गया था। उस समय का चर्चित 'मुर्गाकांड' मीडिया की सुर्खियों में खूब छाया रहा था। हालांकि, उस घटनाक्रम से इतर काशापाट में ग्रामीणों के घर साधारण चूल्हे पर बने कोदे-फफड़े के चिलटू और पहाड़ी साग-सब्जी को खुशी-खुशी खाकर सीएम सुक्खू ने यह संदेश दिया कि वे आम जनता और जमीनी संस्कृति से गहरे जुड़े हुए नेता हैं।
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नाटी के रंग में रंगे CM, ग्रामीणों के साथ जमकर थिरके
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। ग्रामीणों और कलाकारों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री ने नाटी में भी हिस्सा लिया। जैसे ही लोक धुनें बजीं, माहौल में उत्साह और बढ़ गया। मुख्यमंत्री का ग्रामीणों के साथ नाटी डालना वहां मौजूद लोगों के लिए खास पल बन गया। इससे कार्यक्रम में औपचारिकता कम और अपनापन अधिक दिखाई दिया।
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काशापाट की छात्राओं ने भी पारंपरिक नाटी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति के जरिए उन्होंने हिमाचली लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने के साथ युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन अपनाने का संदेश दिया।
रात गांव में बिताई, चौपाल पर सुनीं लोगों की बातें
‘सरकार गांव के द्वार’ की सबसे खास बात मुख्यमंत्री का ग्रामीणों के बीच रात्रि प्रवास रहा। उन्होंने स्थानीय ग्रामीण के घर रात बिताकर क्षेत्र की जीवनशैली को करीब से समझने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने सड़क, शिक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी अपनी मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। लोगों का कहना था कि मुख्यमंत्री के गांव में रुकने से उन्हें अपनी समस्याएं सीधे सरकार के मुखिया तक पहुंचाने का अवसर मिला।
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काशापाट स्कूल को मिलेगा नया भवन, 2 करोड़ की घोषणा
काशापाट दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के शिक्षा ढांचे से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने काशापाट स्कूल के नए भवन के लिए 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इसके साथ ही क्षेत्र में सड़क और परिवहन सुविधाओं से संबंधित मांगों पर भी आवश्यक कदम उठाने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री ने काशापाट क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
बच्चों से मिले तो चेहरे पर दिखी आत्मीयता
काशापाट में मुख्यमंत्री ने बच्चों और विद्यार्थियों से भी मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से बातचीत की, उनका हाल जाना और उनकी बातों को सुना। मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर बच्चे भी उत्साहित नजर आए। छात्राओं की नाटी और नशे के खिलाफ दिए गए संदेश ने कार्यक्रम को सामाजिक सरोकार से भी जोड़ दिया। रामपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से एंटी-चिट्टा जागरूकता कार्यक्रमों में भी भाग लेने का कार्यक्रम रहा।
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पुराना 'जंगली मुर्गा' विवाद भी आया याद, इस बार थाली में दिखा पहाड़ी स्वाद
मुख्यमंत्री सुक्खू के ग्रामीण रात्रि प्रवास की बात हो और उनके पुराने ‘जंगली मुर्गा’ विवाद का जिक्र न हो, यह भी संभव नहीं। दिसंबर 2024 में शिमला जिले के टिक्कर में मुख्यमंत्री के रात्रि प्रवास के दौरान भोजन को लेकर ‘जंगली मुर्गा’ विवाद सामने आया था। वायरल वीडियो और भोजन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हुए थे।
मुख्यमंत्री ने उस समय कहा था कि ग्रामीणों ने देसी मुर्गा तैयार किया था और उन्होंने स्वयं मांस नहीं खाया था। बाद में पुलिस ने कथित फर्जी खबर/बदनामी फैलाने के मामले में केस दर्ज किए थे। काशापाट में इस बार तस्वीर कुछ अलग रही। यहां मुख्यमंत्री के स्वागत और मेहमाननवाजी की चर्चा स्थानीय पहाड़ी व्यंजनों, मोटे अनाज, पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत के लिए हुई।
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दुर्गम गांव तक सरकार पहुंची, ग्रामीणों को सीधे संवाद का मंच
काशापाट में मुख्यमंत्री का रात्रि प्रवास ‘सरकार गांव के द्वार’ अभियान के उस उद्देश्य को सामने लाता है, जिसके तहत सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सीधे सुनने और स्थानीय जरूरतों को समझने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों के लिए यह इसलिए भी खास रहा क्योंकि मुख्यमंत्री ने सिर्फ मंच से भाषण देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि गांव के बीच पहुंचे, स्थानीय भोजन का स्वाद लिया, ग्रामीणों के साथ नाटी डाली और उनकी समस्याएं सुनीं।
काशापाट की इस शाम में सरकार, गांव और हिमाचली संस्कृति एक ही मंच पर दिखाई दिए—जहां मुख्यमंत्री मेहमान भी थे और कुछ घंटों के लिए गांव की उसी जिंदगी का हिस्सा भी बन गए, जिसे वे दूर शिमला से नीतियों के जरिए देखते हैं।
