ऊना। दूरियों के सफर को छोटा कर दिया, खोए रिश्तों को फिर से सजा दिया। हिमाचल प्रदेश की ऊना जिला पुलिस ने यह शब्दों बखूबी चरितार्थ कर दिखाए हैं। ऊना जिले की पुलिस ने मानवता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए परिवार से बिछड़े एक दस साल के बच्चे को उसके परिवार से मिलाया है। इस मामले के बाद हर तरफ ऊना पुलिस की तारीफ हो रही है।

परिजनों से मिलाया बिछड़ा बच्चा  

यह कहानी केवल एक बच्चे के अपने घर लौटने की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है जो व्यवस्था, तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के मेल से पैदा होता है। हिमाचल प्रदेश में घटित यह वाकया बताता है कि आधार केवल पहचान पत्र नहीं, बल्कि कई बार टूटते रिश्तों को जोड़ने वाली एक मजबूत कड़ी भी बन जाता है।

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आधार बना सहारा

दरअसल, हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में पुलिस को कुछ समय पहले एक 10 वर्षीय किशोर बेसहारा अवस्था में मिला। बालक न तो अपना पूरा पता बता पा रहा था और न ही यह स्पष्ट कर पा रहा था कि वह यहां कैसे पहुंचा। उम्र छोटी थी, चेहरा सहमा हुआ और आंखों में घर की तलाश साफ झलक रही थी।

हिमाचल में भटक रहा बच्चा

पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसे तुरंत संरक्षण में लिया और जरूरी औपचारिकताओं के बाद हमीरपुर स्थित बाल देखभाल संस्थान भेजा गया। बाल देखभाल संस्थान में अमन कुमार (बदला हुआ नाम नहीं, बल्कि उसकी असली पहचान) को सुरक्षित माहौल, भोजन और पढ़ाई की सुविधा दी गई।

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परिवार से मिला बच्चा

साथ ही, सबसे अहम चुनौती थी- उसके परिवार का पता लगाना। बच्चे से मिली सीमित जानकारी के आधार पर अलग-अलग स्तर पर प्रयास शुरू किए गए, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पा रहा था।

आधार बना पहचान की कुंजी

इसी दौरान समन्वित प्रयासों के तहत UIDAI (आधार) की सहायता ली गई। तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए बच्चे की पहचान को लेकर जांच आगे बढ़ी। आधार से जुड़े रिकॉर्ड ने धीरे-धीरे वह रास्ता दिखाया, जिसने अमन को उसके असली घर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

 

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कैसे बिछड़ा था परिवार?

आधार से मिली जानकारी के आधार पर बिहार राज्य के संबंधित जिले से संपर्क स्थापित किया गया। वहां के प्रशासन और पुलिस ने भी तत्परता दिखाई। कुछ ही समय में यह पुष्टि हो गई कि अमन का परिवार बिहार में ही रहता है और वह किसी कारणवश उनसे बिछुड़ गया था।

माता-पिता के नहीं रुके आंसू

जब अमन को उसके परिवार तक पहुंचाया गया, तो वह पल शब्दों में बांधना आसान नहीं था। बेटे को सकुशल सामने देखकर माता-पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। महीनों की अनिश्चितता, चिंता और पीड़ा उस एक क्षण में आंसुओं के साथ बह निकली। अमन भी अपने माता-पिता से लिपटकर रो पड़ा-यह रोना डर का नहीं, बल्कि सुकून का था।

 

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बेटा मिला सुरक्षित वापस

परिजनों ने हिमाचल प्रदेश पुलिस, बाल देखभाल संस्थान और प्रशासन का आभार जताया। उनका कहना था कि यदि समय रहते सही दिशा में प्रयास न हुए होते, तो शायद उनका बेटा यूं सुरक्षित वापस न मिल पाता। बच्चे को गले लगा उसकी मां फूट-फूट कर रोई।

पहचान से आगे की भूमिका

यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि आधार केवल सरकारी योजनाओं या पहचान तक सीमित नहीं है। सही समय पर, सही तरीके से उपयोग होने पर यह उन परिवारों को फिर से जोड़ सकता है, जो परिस्थितियों की वजह से बिछुड़ जाते हैं। हिमाचल और बिहार- दो राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, पुलिस की मानवीय सोच और UIDAI की तकनीकी सहायता ने मिलकर एक बच्चे का बचपन लौटाया है।

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