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May 25, 2026
माता चिंतपूर्णी ने हर लिए सारे दुख : आंखों में पट्टी बांध, घुटनों के बल ज्योति लेकर दरबार पहुंचा पंजाबी
पिछले 22 साल से माता के दर्शन करने आ रहा पंजाबी
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के चिंतपूर्णी माता मंदिर में एक श्रद्धालु की अनोखी भक्ति इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। आंखों पर पट्टी बांधकर, हाथों में जलती हुई ज्योत लेकर और घुटनों के बल चलते हुए एक भक्त माता चिंतपूर्णी के दरबार पहुंचा।
उसकी इस कठिन तपस्या और अटूट श्रद्धा को देखकर मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी भावुक हो उठे। बताया जा रहा है कि भक्त ने माता के प्रति अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद यह अनोखी श्रद्धा यात्रा शुरू की थी।
जैसे-जैसे वह मंदिर की ओर बढ़ता गया, रास्ते में लोगों की भीड़ उसे देखने के लिए रुकती रही। कई लोग उसकी आस्था को देखकर हैरान नजर आए, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने उसे माता की सच्ची भक्ति बताया।
जानकारी के अनुसार, ये भक्त बॉबी शर्मा पंजाब के मोगा से आया था। भक्त खुद को मां चिंतपूर्णी का परम भक्त मानता है। बॉबी ने बताया कि वो पिछले करीब 22 साल से लगातार माता चिंतपूर्णी के दरबार आ रहा है। माता चिंतपूर्णी के आशीर्वाद से उसके जीवन में कोई दुख-कष्ट नहीं है। मां ने उसके सारे दुख हर लिए हैं।
भक्त आंखों पर काली पट्टी बांधे हुए था और उसके हाथों में जलती हुई ज्योत थी। कठिन रास्ता होने के बावजूद उसने अपना सफर नहीं रोका। वह घुटनों के बल धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा। रास्ते में कई बार लोग उसे सहारा देने के लिए आगे आए, लेकिन उसने अपनी तपस्या जारी रखी।

मंदिर के आसपास मौजूद लोगों का कहना था कि उन्होंने पहली बार किसी श्रद्धालु को इस तरह माता के दरबार में पहुंचते देखा। माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया और मंदिर परिसर में आस्था का अलग ही दृश्य देखने को मिला।
कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि लोग अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार माता के दरबार में माथा टेकने आते हैं। मगर इस भक्त की भक्ति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कई लोग उसके साथ चलते रहे और उसके हौसले की सराहना करते रहे।
माता चिंतपूर्णी मंदिर देशभर में आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। कोई पैदल यात्रा करता है तो कोई विशेष पूजा-अर्चना करवाता है। मगरइस भक्त की अनोखी साधना ने हर किसी को हैरानी में डाल दिया।
मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालु ने माता के चरणों में शीश नवाया और पूजा-अर्चना की। वहां मौजूद लोगों ने उसकी श्रद्धा और विश्वास को माता के प्रति सच्ची आस्था का प्रतीक बताया। भक्त की श्रद्धा देखकर कई लोग “जय माता दी” के जयकारे लगाने लगे।