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May 23, 2026

हिमाचल: टूट गई दो फौजी भाईयों की जोड़ी, बेटे के सिर सेहरा बांधने की तैयारी में थी मां; टूटे सारे सपने

नम आंखों से जवान मुकेश को दी अंतिम विदाई, छोटे भाई ने दी चिता को मुखाग्नि

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himachal jawan

सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के पांवटा साहिब क्षेत्र के टोका नंगला गांव में उस समय पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई, जब 30 वर्षीय लांस नायक मुकेश कुमार का पार्थिव शरीर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाया गया और अंतिम संस्कार किया गया। 15 आर्टिलरी रेजीमेंट (फील्ड) के जवानों ने अपने साथी को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।

 

गांव में जैसे ही यह खबर पहुंची, माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। हर आंख नम थी और हर घर से शोक की आवाजें सुनाई दे रही थीं। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं परिवार के अन्य सदस्य भी इस असहनीय दुख से टूट गए।

बचपन से ही थे होनहार और देशभक्त

लांस नायक मुकेश कुमार का जन्म 25 जून 1996 को टोका नंगला गांव में पिता उजागर सिंह और माता राजबाला के घर हुआ था। बचपन से ही मुकेश मेहनती, अनुशासित और खेलों में रुचि रखने वाले युवा थे। गांव में उन्हें एक जिम्मेदार और शांत स्वभाव के युवक के रूप में जाना जाता था।

 

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देश सेवा का जज़्बा रखते हुए उन्होंने 26 जून 2015 को भारतीय सेना जॉइन की और 15 आर्टिलरी रेजीमेंट (फील्ड) में अपनी सेवाएं देना शुरू किया। वर्तमान में वे देहरादून में तैनात थे और अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे थे। उनके परिवार में छोटा भाई भी सेना में सेवारत है, जबकि बहन अनीता गृहिणी हैं। दो भाइयों में एक के रूप में मुकेश परिवार का गर्व थे, जिनसे सभी को बहुत उम्मीदें थीं।

टूट गई दो फौजी भाइयों की अटूट जोड़ी

पांवटा साहिब के टोका नंगला गांव में एक ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। उजागर सिंह और राजबाला ने कड़ी मेहनत और संघर्ष के साथ अपने दोनों बेटों मुकेश कुमार और मंजीत को पढ़ाया-लिखाया था। माता-पिता के सपनों को साकार करते हुए दोनों भाई भारतीय सेना में भर्ती हुए और परिवार के लिए गर्व का कारण बने। गांव में दोनों भाइयों की जोड़ी मिसाल मानी जाती थी, लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने इस अटूट रिश्ते को हमेशा के लिए बिछड़ने पर मजबूर कर दिया। बड़े भाई मुकेश की शहादत के बाद अब छोटा भाई मंजीत अपने उस साथी और हमसफर भाई के बिना रह गया है, जिसके साथ उसने बचपन से लेकर फौज की वर्दी तक का सफर तय किया था।

बेटे के सिर सेहरा बांधने की तैयारी में थी मां

मां राजबाला इन दिनों अपने बड़े बेटे मुकेश की शादी के सपने संजो रही थीं। बेटी की शादी के बाद अब उनकी तमन्ना घर में बहू लाने की थी और इसी वजह से वह मुकेश के लिए रिश्ते भी देख रही थीं। परिवार में खुशियों की तैयारियां शुरू होने वाली थीं और मां अपने बेटे के सिर पर सेहरा सजा हुआ देखने का इंतजार कर रही थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे की बारात निकालने और शादी की शहनाइयां सुनने के सपने मां ने देखे थे, वही बेटा तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा। खुशी के अरमान पलभर में मातम में बदल गए और बेटे को दूल्हे के रूप में विदा करने का सपना देखने वाली मां को उसे अंतिम विदाई देनी पड़ी।

छुट्टी पर घर आए थे, खेत में हुआ दर्दनाक हादसा

कुछ दिन पहले ही मुकेश कुमार छुट्टी लेकर अपने पैतृक गांव आए हुए थे। 21 मई की सुबह वे अपने पिता के साथ खेतों में ट्रैक्टर से गोबर खाद डालने का काम कर रहे थे। इसी दौरान वे ट्रॉली पर पीछे खड़े थे, तभी अचानक खेत के पास से गुजर रही हाई टेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गए। करंट लगते ही वे संतुलन खो बैठे और ट्रॉली से नीचे गिर गए। 

 

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जवान ने तोड़ा दम

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजन और ग्रामीण उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल पांवटा साहिब लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बाद में घटना की गंभीरता और सेना से जुड़ा मामला होने के कारण उनका पार्थिव शरीर पोस्टमार्टम के लिए डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन रेफर किया गया।

सेना और प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान सेना की 15 आर्टिलरी रेजीमेंट के अधिकारी भी मौजूद रहे। उप-कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल संजय, नायब सूबेदार अनिल, नायब सूबेदार देवेंद्र सिंह, गनर अभिषेक, गनर अमन सहित कई सैन्य अधिकारी वहां पहुंचे। इसके साथ ही भूतपूर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब-शिलाई क्षेत्र के पदाधिकारी भी लगातार परिवार के साथ खड़े रहे और उन्हें ढांढस बंधाया। तहसील प्रशासन की ओर से भी अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

 

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गांव पहुंचते ही मचा कोहराम

पोस्टमार्टम के बाद जब शाम के समय मुकेश कुमार का पार्थिव शरीर उनके गांव टोका नंगला लाया गया, तो पूरा माहौल मातम में बदल गया। जैसे ही एंबुलेंस गांव पहुंची, माता-पिता और परिवार के सदस्य जोर-जोर से रोने लगे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। पूरा गांव एकत्र हो गया और हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम बार देखने पहुंचा। लोगों ने कहा कि मुकेश कुमार सिर्फ एक सैनिक नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र का गौरव थे।

पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

अगले दिन सुबह पूरे सैन्य सम्मान के साथ लांस नायक मुकेश कुमार की अंतिम यात्रा निकाली गई। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और “शहीद मुकेश अमर रहें” के नारे गूंज उठे। पूर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब-शिलाई क्षेत्र के सदस्यों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की और भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीण, रिश्तेदार और आसपास के क्षेत्रों से आए लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

 

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परिवार और क्षेत्र में गहरा शोक

मुकेश कुमार की अचानक हुई मृत्यु ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया है। माता-पिता अपने जवान बेटे के भविष्य के सपने देख रहे थे, लेकिन यह दर्दनाक हादसा सब कुछ छीन ले गया। गांव और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। लोग इसे परिवार के साथ-साथ देश के लिए भी बड़ी क्षति बता रहे हैं। हर कोई नम आंखों से मुकेश कुमार को याद कर रहा है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

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