#विविध
May 24, 2026
हिमाचल के इतिहास में पहली बार- 2 साल की बच्ची बनी मुख्यातिथि, आपदा में खो चुकी है पूरा परिवार
कुथाह मेले में भावुक कर गया पल
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आयोजित जिला स्तरीय कुथाह मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या इस बार बेहद भावुक माहौल में संपन्न हुई। सराजघाटी में आयोजित इस मेले के इतिहास में पहली बार एक नन्हीं बच्ची को मुख्यातिथि के रूप में मंच पर सम्मान दिया गया।
यह बच्ची थी “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” के रूप में पहचानी जाने वाली दो वर्षीय नीतिका। नीतिका ने पिछले साल बरसात में हुई भारी तबाही व आपदा में माता-पिता और दादी को खो दिया था।
थुनाग उपमंडल प्रशासन ने नीतिका को विशेष अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में बुलाया था। वह अपने परिजनों के साथ मेले में पहुंची, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत उसके हाथों दीप जलाकर करवाई गई। मंच पर पहुंचते ही लोगों ने तालियों से उसका स्वागत किया और पूरा माहौल भावुक हो उठा।
कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की ओर से SDM थुनाग संजीत शर्मा ने नीतिका को हिमाचली टोपी, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी त्रासदी झेलने के बावजूद नीतिका आज साहस और उम्मीद का प्रतीक बन चुकी है।
गौरतलब है कि 30 जून, 2025 की रात मंडी जिले के गोहर क्षेत्र के परवाड़ा गांव में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों को तबाह कर दिया था। तेज बहाव और मलबे की चपेट में आने से नीतिका के माता-पिता और दादी की जान चली गई थी। उस वक्त मासूम नीतिका घर के भीतर सो रही थी और चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गई थी।
अगली सुबह जब ग्रामीण और राहत दल मौके पर पहुंचे तो अकेली बची नीतिका को देखकर हर कोई भावुक हो गया। घटना के बाद उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं और देशभर से लोगों ने उसके प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने उसे गोद लेने की इच्छा भी जताई थी।
वर्तमान में नीतिका अपनी बुआ के साथ रह रही है, जो उसकी देखभाल कर रही हैं। प्रदेश सरकार ने उसे “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” योजना के तहत संरक्षण दिया है और जिला प्रशासन लगातार उसकी सहायता में जुटा हुआ है।
कुछ समय पहले PM नरेंद्र मोदी ने भी हिमाचल दौरे के दौरान नीतिका से मुलाकात कर उसे स्नेह दिया था। वहीं अब कुथाह मेले के मंच पर मुख्यातिथि के रूप में उसका सम्मान होना लोगों के लिए बेहद भावुक क्षण बन गया।
मेले में मौजूद लोगों का कहना था कि यह सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ चुकी एक मासूम बच्ची के साहस को सलाम करने का अवसर था।