शिमला। हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी HPPCL के मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में CBI की चार्जशीट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि विमल नेगी लंबे समय से विभागीय दबाव, मानसिक प्रताड़ना और प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना कर रहे थे, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।

करोड़ों के भुगतान को लेकर बनाया जा रहा था दबाव

CBI चार्जशीट के अनुसार, तत्कालीन MD हरिकेश मीणा पर आरोप है कि उन्होंने विभागीय प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हुए एक ठेकेदार को भुगतान कराने के लिए दबाव बनाया।

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जांच में दावा किया गया है कि, ऊना जिले की 32 मेगावाट क्षमता वाली पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत करीब 220 करोड़ रुपये बताई गई है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि परियोजना से संबंधित कार्य पूरी तरह पूर्ण न होने के बावजूद लगभग 16.29 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर दबाव बनाया जा रहा था।

बैकडेट में दस्तावेज जारी करने का आरोप

CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि परियोजना से जुड़े वित्तीय और तकनीकी मामलों को लेकर पहले भी आपत्तियां दर्ज की गई थीं। बताया गया है कि तत्कालीन अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, लेकिन बाद में जिम्मेदारियों में बदलाव किए गए और विमल नेगी को संबंधित कार्यों से जोड़ा गया।

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चार्जशीट में दावा किया गया है कि वर्ष 2024 के दौरान कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विमल नेगी पर बैकडेट में दस्तावेजों और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने का दबाव बनाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, नेगी लगातार इस दबाव का विरोध कर रहे थे, जिससे उनके और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तनाव बढ़ता गया।

एएसआई पर डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ का आरोप

मामले में हिमाचल पुलिस के एक एएसआई को भी सह-आरोपी बनाया गया है। CBI का आरोप है कि विमल नेगी से संबंधित एक महत्वपूर्ण पेनड्राइव को कब्जे में लेने के बाद उसे फॉर्मेट किया गया, जिससे संभावित डिजिटल साक्ष्यों को नुकसान पहुंचा। जांच एजेंसी का मानना है कि इससे मामले से जुड़े अहम तथ्यों पर प्रभाव पड़ सकता था।

 

CBI ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विमल नेगी को बार-बार कार्यालय में बुलाया जाता था और कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता था। जांच के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिनमें लगातार मानसिक दबाव और कार्यस्थल पर तनावपूर्ण माहौल का जिक्र किया गया है। एजेंसी का दावा है कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही।

वीआरएस लेने पर भी कर रहे थे विचार

CBI ने तत्कालीन निदेशक देशराज की भूमिका पर भी गंभीर टिप्पणियां की हैं। रिपोर्ट के अनुसार विमल नेगी को बार-बार कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया जाता था और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाता था जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ता गया। जांच में दर्ज बयानों के आधार पर एजेंसी ने कहा है कि यह प्रताड़ना लंबे समय तक जारी रही।

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जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, विमल नेगी कथित तौर पर नौकरी छोड़ने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS लेने पर भी विचार कर रहे थे। बताया गया है कि वे लगातार बढ़ते दबाव और तनाव से परेशान थे तथा अपने करीबी लोगों से इस बारे में चर्चा भी कर चुके थे।

मार्च 2025 में लापता हुए थे विमल नेगी

विमल नेगी मार्च 2025 में रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। कई दिनों तक तलाश अभियान चलने के बाद उनका शव बिलासपुर स्थित गोविंद सागर झील से बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे प्रदेश में व्यापक चर्चा और राजनीतिक बहस को जन्म दिया था। बाद में मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी।

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जांच के दौरान कुछ अधिकारियों को पद से हटाया गया और विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई। अब CBI की चार्जशीट सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपों और साक्ष्यों की कानूनी जांच होगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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