#अपराध
July 22, 2026
हिमाचल : नशे के चक्कर में गई सरकारी नौकरी, बिजली बोर्ड के 3 चिट्टा तस्कर कर्मी बर्खास्त
शिक्षक संग चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया गया कर्मचारी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के कारोबार पर लगाम कसने के लिए सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने बड़ा फैसला लेते हुए चिट्टा तस्करी और नशे से जुड़े मामलों में संलिप्त पाए गए तीन कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
विभागीय जांच पूरी होने के बाद की गई इस कार्रवाई को सरकार की "जीरो टॉलरेंस" नीति का हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी सेवा में रहते हुए अगर कोई कर्मचारी नशे के अवैध कारोबार या उसके इस्तेमाल में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में मंडी विद्युत मंडल में कार्यरत जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (IT) राहुल के अलावा गोहर विद्युत मंडल के टी-मेट लाल सिंह और हरीश शामिल हैं। विभाग का कहना है कि तीनों के खिलाफ दर्ज मामलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विभागीय जांच कराई गई, जिसके बाद उन्हें सेवा से हटाने का निर्णय लिया गया।
राहुल का नाम पहली बार उस समय चर्चा में आया था जब वर्ष 2024 में उसे रिवालसर क्षेत्र में एक शिक्षक के साथ कथित तौर पर चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में जांच के दौरान उसका नाम बिलासपुर में नशे के सेवन से हुई एक युवक की मौत से जुड़े मामले में भी सामने आया। इन घटनाओं के बाद विभाग ने उसके खिलाफ अलग से अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी।
वहीं, गोहर मंडल के कर्मचारी लाल सिंह के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों का रिकॉर्ड सामने आया। पहली बार उसे वर्ष 2025 में चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जमानत पर बाहर आने के बावजूद वह दोबारा वर्ष 2026 में नशे से जुड़े मामले में पुलिस के हत्थे चढ़ गया। लगातार दो मामलों में नाम आने के बाद विभाग ने उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए नौकरी समाप्त कर दी।
इसी प्रकार गोहर मंडल के ही कर्मचारी हरीश को भी वर्ष 2024 में चिट्टा बरामदगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ दर्ज मामले और विभागीय जांच की रिपोर्ट के आधार पर उसे भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
सरकार की सख्ती केवल बिजली बोर्ड तक सीमित नहीं है। शिक्षा विभाग में भी नशे से जुड़े मामले में एक कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर कर्मचारी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उसके खिलाफ भी सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई की जा सकती है। इससे साफ है कि प्रदेश सरकार सभी विभागों में एक समान नीति अपनाते हुए नशे से जुड़े मामलों पर कड़ा रुख बनाए हुए है।
बिजली बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। विभाग का कहना है कि अगर कोई कर्मचारी नशे के अवैध कारोबार या उसके उपयोग में शामिल पाया जाता है तो उसे किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
प्रदेश में अब तक नशा तस्करी और चिट्टा नेटवर्क से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 36 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
इनमें सबसे अधिक संख्या पुलिस विभाग के कर्मचारियों की है। जबकि शिक्षा सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। इसके अलावा बैंक, सेना और डाक विभाग से जुड़े कई कर्मचारियों के नाम भी विभिन्न जांचों में सामने आए हैं- जिनसे संबंधित मामलों की जांच अभी जारी है।