#अपराध
July 21, 2026
गगल एयरपोर्ट के आसपास करोड़ों का भूमि खेल! फर्जी कृषक बन खरीदी 100 कनाल जमीन, केस दर्ज
विजिलेंस के रडार पर भूमाफिया से लेकर कई राजस्व अधिकारी
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से एक बड़े भूमि घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पर्यटन और निवेश की दृष्टि से तेजी से विकसित हो रहे गगल एयरपोर्ट क्षेत्र के आसपास कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर 100 कनाल से अधिक कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त की गई। आरोप है कि गैर कृषक लोगों ने फर्जी दस्तावेजों और भ्रष्ट तंत्र dh मिलीभगत के सहारे खुद को कृषक दर्शाया और बाद में जमीन को ऊंचे दामों पर बेचकर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया।
अब इस पूरे घालमेल पर राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने शिकंजा कस दिया है। इस मामले में न केवल फर्जी कागजात बनाने वाले भूमाफिया बल्कि तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी पूरी तरह से संदेह के घेरे में आ गई है। मामले के सामने आने के बाद विजिलेंस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।
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हिमाचल प्रदेश में गैर-हिमाचली या गैर-कृषक के लिए जमीन खरीदने को लेकर लागू सख्त कानून 'धारा 118' की धज्जियां कैसे उड़ाई गईं, विजिलेंस की जांच में इसकी परत दर परत खुल गई है:
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सूत्रों के अनुसार गगल एयरपोर्ट और उसके आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में जमीनों की कीमतों में भारी उछाल आया है। एयरपोर्ट विस्तार और विकास परियोजनाओं की संभावनाओं के चलते इस क्षेत्र की भूमि निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जांच एजेंसियां इस पहलू को भी खंगाल रही हैं कि क्या भविष्य में जमीनों के बढ़ते मूल्य को देखते हुए पहले से ही बड़े पैमाने पर भूमि एकत्रित करने की रणनीति अपनाई गई थी।
गगल हवाई अड्डे के विस्तार और आसपास के इलाकों में बेनामी व अवैध जमीनी सौदों की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था।
SIT की स्टेटस रिपोर्ट और जुटाए गए पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर विजिलेंस ने अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
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मामले का सबसे गंभीर पहलू यह माना जा रहा है कि जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं के संकेत भी मिले हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ महत्वपूर्ण प्रविष्टियां और टिप्पणियां भूमि अभिलेखों में दर्ज नहीं की गईं, जिससे संबंधित व्यक्तियों को कृषक के रूप में प्रस्तुत करना आसान हो गया। विजिलेंस अब यह जांच कर रही है कि यह केवल लापरवाही थी या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित मिलीभगत काम कर रही थी।
इस पूरे प्रकरण में केवल जमीन खरीदने वाले लोग ही नहीं, बल्कि राजस्व विभाग से जुड़े कई अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। जांच में तत्कालीन राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि पटवारी, कानूनगो, तहसील स्तर के अधिकारियों और पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े कुछ जिम्मेदार पदों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
विजिलेंस अब केवल जमीन खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहना चाहती। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि इन सौदों से कितना आर्थिक लाभ अर्जित किया गया और यह धन कहां-कहां इस्तेमाल हुआ। अधिकारियों का मानना है कि यदि वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी सामने आती है तो इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।