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June 8, 2026
सुक्खू सरकार का यू-टर्न : अब सिर्फ CM की कटेगी सैलरी, मंत्रियों-विधायकों को मिलेगा पूरा पैसा
सुक्खू सरकार ने वापस लिया वेतन स्थगन का फैसला
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने कुछ माह पहले वित्तीय दबाव का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और कुछ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों के वेतन का एक हिस्सा अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया था। अब राज्य की आर्थिक स्थिति की समीक्षा के बाद सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया है।
सुक्खू सरकार ने फैसले में बदलाव करते हुए अधिकांश प्रभावित वर्गों के लिए वेतन स्थगन समाप्त करने का निर्णय लिया है। राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए CM सुक्खू ने स्पष्ट किया।
CM सुक्खू ने वित्त विभाग को निर्देश दिए कि वेतन रोकने से संबंधित अधिसूचना अब सिर्फ उन पर लागू रहेगी। जबकि अन्य सभी के लिए इसे वापस लिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि रोकी गई राशि का भुगतान अगले महीने नियमित वेतन के साथ कर दिया जाएगा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई नीतियों और लगातार किए गए प्रयासों का असर अब दिखाई देने लगा है। उनके अनुसार प्रदेश की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है और आर्थिक गतिविधियों में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है। साथ ही पूर्व में चली आ रही कुछ व्यवस्थाओं में सुधार कर राजकोषीय स्थिति को अधिक सुदृढ़ बनाने की कोशिश की गई है।
बैठक में सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने 65 से 70 वर्ष आयु वर्ग के उन पेंशनभोगियों के लंबित एरियर जारी करने के निर्देश दिए, जिनका भुगतान अभी तक लंबित है। उन्होंने कहा कि इन लाभार्थियों को अगले महीने उनका बकाया दिया जाएगा। इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध करवाने का आश्वासन भी सरकार की ओर से दिया गया।
बैठक में कर्मचारियों के बकाया एरियर और महंगाई भत्ते से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कर्मचारी प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके हितों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्तमान सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया है। जिसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। CM सुक्खू ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना लागू किए जाने के बाद केंद्र सरकार से मिलने वाली लगभग 1200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रभावित हुई।
उनके अनुसार अगर यह राशि राज्य को मिलती रहती तो कर्मचारियों के लंबित वित्तीय दायित्वों का निपटारा करना अपेक्षाकृत आसान होता। इसके बावजूद सरकार कर्मचारियों की मांगों और लंबित मामलों पर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार कर रही है और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप समाधान निकालने का प्रयास जारी है।
वित्तीय मामलों की समीक्षा के लिए आयोजित इस बैठक में वित्त विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, विशेष सचिव सौरभ जस्सल सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया और विभिन्न वित्तीय मुद्दों पर चर्चा की।