मंडी। हिमाचल प्रदेश के शांत माने जाने वाले गांव अब नशे के अड्डों में तब्दील हो रहे हैं। हाल ही में एक बार फिर मंडी जिला के नेरचौक क्षेत्र में नशे का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें बल्ह पुलिस ने टरोह गांव निवासी नीरज शर्मा को छठी बार चिट्टे सहित गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 2ण्70 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है। यह कार्रवाई स्थानीय ग्रामीणों की सूचना और पुलिस की सतर्कता के चलते संभव हो सकी।

कमरे में लड़की के साथ मिला चिट्टा सप्लायर

पुलिस ने जब नीरज शर्मा के घर पर देर रात छापा मारा, तो उसके कमरे में एक युवती भी मौजूद थी, जो धर्मपुर क्षेत्र की निवासी बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि युवती भी चिट्टे की लत से ग्रस्त है। हालांकि उसे पहली बार पकड़े जाने के चलते सख्त चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है।

 

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इस कार्रवाई का नेतृत्व एसएचओ बल्ह संजय कुमार ने किया, जिनके साथ हैड कांस्टेबल रामचंद्र, मनु राणा, कॉन्स्टेबल राजकुमार और गृह रक्षक सावित्री देवी भी शामिल थे। इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर रामचंद्र ने जानकारी दी कि यह पूरी कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

ग्रामीणों ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि पुलिस द्वारा नीरज शर्मा को बार-बार गिरफ्तार किया जाता है, लेकिन हर बार उसे जल्द ही छोड़ दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि नीरज दिन में कभी दिखाई नहीं देता और केवल रात को ही बाहर निकलता है, जिससे संदेह और भी गहरा हो जाता है। उनका कहना है कि अब नशे का यह धंधा बाजारों से हटकर गांवों की ओर बढ़ रहा है, जो कि बेहद चिंताजनक स्थिति है।

 

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बार-बार गिरफ्तारी के बावजूद खुली छूट?

नीरज शर्मा पहले भी पांच बार नशे के मामलों में गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन उसे हर बार जमानत या मामूली सजा देकर छोड़ दिया जाता है। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ कई शिकायतें लम्बे समय से आ रही थीं और इस बार उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए विशेष योजना बनाई गई थी।

हिमाचल में बढ़ती नशे की समस्या

यह अकेला मामला नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश में नशे की लत तेजी से फैल रही है। पहले जहां नशे के मामले शहरों तक सीमित थे, वहीं अब यह जहर गांव-गांव तक फैल चुका है। युवाओं को नशे की गिरफ्त में लाकर उनके भविष्य को बर्बाद किया जा रहा है। खास तौर पर चिट्टा जैसे खतरनाक पदार्थ का फैलाव अब एक सामाजिक संकट बन गया है।

 

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राज्य सरकार और प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। महज गिरफ्तारी और चेतावनी से अब काम नहीं चलने वाला। ऐसे अपराधियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जरूरत है ताकि नशे का यह नेटवर्क जड़ से खत्म किया जा सके। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए शिक्षा, जागरूकता और पुनर्वास कार्यक्रमों को प्राथमिकता देनी होगी।

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