मंडी। हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी इस कद्र बढ़ गई है कि अब युवा पीढ़ी सरकारी नौकरी पाने के लिए गलत हथकंडे अपनाने लगे हैं। सरकारी नौकरी के लिए यह युवा अब फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने लगे हैं। ऐसे ही एक बड़े मामले का खुलासा मंडी जिला में भी हुआ है। मंडी जिला में चार डॉक्टरों ने फर्जी दस्तावेज बनवा कर सरकारी नौकरी हथिया ली है। मामले का खुलासा होने पर अब इन चारों डॉक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।

फर्जी प्रमाण पत्र से चार ने हथियाई सरकारी नौकरी

दरअसल आयुर्वेदिक विभाग में डॉक्टर की नौकरी पाने के लिए चार युवाओं ने फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवा लिए। चारों लोगों ने  फर्जी ईडब्ल्यूएस आर्थिक रूप से कमजोर प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी डॉक्टर की नौकरी हथिया ली है। इन चारों डॉक्टरों के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो धर्मशाला ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी है।

 

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महिला ने विजिलेंस को सौंपी थी शिकायत

मिली जानकारी के अनुसार कांगड़ा जिला के बैजनाथ निवासी एक महिला ने आरोप लगाया था कि आयुर्वेदिक विभाग में कुछ डॉक्टरों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाकर आयुर्वेदिक विभाग में सरकारी डॉक्टर की नौकरी प्राप्त की है। जिसकी शिकायत इस महिला ने धर्मशाला विजिलेंस ब्यूरो में की थी। 

 

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2022 में हुई थी नियुक्ति

महिला की शिकायत पर विजिलेंस धर्मशाला ने जांच पड़ताल की तो आरोप सही पाए गए। विजिलेंस ने आयुष विभाग से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। जिसमें पता चला कि साल 2022 में दो अधिसूचना के तहत आयुर्वेदिक डॉक्टरों को नियुक्ति दी गई है। दोनों अधिसूचना के अनुसार कुल 14 आयुर्वेदिक डॉक्टरों को ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति दी गई है।

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इन 14 आयुर्वेदिक डॉक्टरों में जिला कांगड़ा में पांच, जिला हमीरपुर में चार, मंडी जिला में चार और बिलासपुर जिला में एक डॉक्टर ने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी कर नौकरी पाई है। जांच में मंडी जिला के चार उम्मीदवारों के ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की जांच संबंधित तहसीलदारों के माध्यम से करवाई गई। जिसमें यह प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।

विजिलेंस ने दर्ज किया मामला

अब विजिलेंस मंडी ने हीरानगर, चुराग, छतरी और टिहरा के चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 465, 467, 468, 471 के तहत केस दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि अब इन डॉक्टरों की जहां नौकरी जाएगी। वहीं इनसे अब तक लिए गए वेतन की रिकवरी भी हो सकती है।

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