हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला से एक ऐसी घटना सामने आई है। जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक 11 माह की बच्ची के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया है। या यूं कहें कि मां ने खुद ही अपनी 11 माह की बच्ची को अकेला छोड़ दिया। महिला ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। महिला ने ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाया, इसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।

11 माह की बच्ची के सिर से उठा मां का साया

मामला हमीरपुर जिला के बिझड़ी उपमंडल के महारल गांव से सामने आया है। यहां 26 वर्षीय विवाहिता लक्ष्मी देवी ने अपने ही घर में फंदा लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। मासूम बच्ची की किलकारियों के बीच ऐसी खामोशी पसरी, जो पूरे गांव को स्तब्ध कर गई। बताया जा रहा है कि लक्ष्मी की शादी तीन साल पहले ही संजीव कुमार से हुई थी। महिला का पति संजीव कुमार गुड़गांव में एक निजी कंपनी में कार्यरत है।

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बच्ची को सास के पास देकर महिला ने लगाया फंदा

लक्ष्मी देवी अपने सास ससुर के साथ गांव में रह रही थी। परिवारजनों की मानें तो लक्ष्मी ने रोज की तरह अपनी बच्ची को सास के हवाले किया और कमरे में चली गई। किसी को भनक भी नहीं थी कि वह भीतर ही भीतर इतने भारी मन से जूझ रही है। सास जब बच्ची को नहलाकर उसे मां के पास देने पहुंचीं तो दरवाजा अंदर से बंद था। आवाजें लगाने पर कोई उत्तर नहीं मिला। काफी देर तक दरवाजा न खुलने पर उन्होंने पड़ोसियों और पंचायत को बुलाया। तुरंत पुलिस को भी सूचना दी गई। दियोटसिद्ध पुलिस चौकी प्रभारी प्रकाश चंद व थाना प्रभारी सुखदेव सिंह टीम सहित मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़ा गया।

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दरवाजा तोड़ कर कमरे में किया प्रवेश

दरवाजा तोड़ कर जब कमरे में प्रवेश किया और अंदर का दृश्य देशा तो वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। लक्ष्मी देवी पंखे से लटकी हुई थी। उसे फौरन नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसकी नन्हीं बेटी मां की गोद के लिए रो रही थी, लेकिन अब उसे मां की ममता सिर्फ तस्वीरों और यादों में ही मिलेगी।

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पुलिस तलाश रही आत्महत्या के कारण

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए हमीरपुर जिला अस्पताल भेज दिया है और परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि आखिर महिला ने ऐसा खौफनाक कदम क्यांे उठाया।

इस घटना पर किसी को नहीं हो रहा विश्वास

गांव के लोगों की आंखें नम हैं। कोई विश्वास नहीं कर पा रहा कि एक हंसती.खिलखिलाती लड़की ने ऐसा कदम क्यों उठाया। लक्ष्मी को अक्सर अपनी बेटी के साथ आंगन में खेलते देखा जाता था। अब उस आंगन में सन्नाटा पसरा है, और एक मासूम बच्ची की आंखें हर पल अपनी मां को ढूंढती फिर रही हैं। यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं, एक मासूम जीवन से ममता की छांव छिन जाने की मार्मिक दास्तान है। सवाल यही है कृ क्या हम कभी जान पाएंगे उस पीड़ा कोए जो लक्ष्मी के मन में चल रही थी?

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