बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पत्नी के व्यवहार से परेशान होकर मामला कोर्ट तक पहुंच गया। लंबी सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने सेना में तैनात एक मेजर को उसकी पत्नी से तलाक दे दिया।
2021 में हुई थी शादी, कुछ समय बाद बिगड़ने लगे रिश्ते
जानकारी के मुताबिक, दोनों की शादी 28 नवंबर 2021 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे। छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद होने लगे और रिश्ते में खटास आती गई।
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आखिरकार 12 फरवरी 2023 को पत्नी ससुराल छोड़कर चली गई। इसके बाद से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। इस दौरान उनके बीच कोई सुलह नहीं हो पाई और उनकी कोई संतान भी नहीं है।
आत्महत्या का वीडियो भेजना बना सबसे बड़ा कारण
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब पत्नी ने आत्महत्या करने की कोशिश की और उसका वीडियो बनाकर अपने पति को भेज दिया। उस समय पति लद्दाख के संवेदनशील सीमा क्षेत्र में तैनात था।
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कोर्ट ने इस घटना को बहुत गंभीर मानते हुए कहा कि इस तरह की हरकत किसी भी व्यक्ति पर भारी मानसिक दबाव डाल सकती है। खासकर एक सैनिक, जो पहले से ही कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा कर रहा हो, उसके लिए यह स्थिति और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो जाती है।
बार-बार शिकायतें कर पति की छवि को पहुंचाया नुकसान
पत्नी ने सेना के उच्च अधिकारियों, मानवाधिकार विभाग और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन में भी कई शिकायतें कीं। लेकिन अदालत में इन शिकायतों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका। कोर्ट ने माना कि बिना पुख्ता सबूत के इस तरह की शिकायतें करना पति की पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाने जैसा है और इसे भी मानसिक क्रूरता का हिस्सा माना गया।
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बिना बताए नौकरी जॉइन करना भी पड़ा भारी
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पत्नी अंबाला (हरियाणा) के हीलिंग टच पार्क अस्पताल में स्टाफ नर्स के तौर पर काम कर रही थी। खास बात यह रही कि उसने यह नौकरी पति को बताए बिना ही जॉइन की थी। कोर्ट ने इसे इस बात का संकेत माना कि पत्नी अलग जीवन जीना चाहती थी और वैवाहिक संबंधों को निभाने में उसकी रुचि नहीं थी।
कई बार सुलह की कोशिश, लेकिन नहीं बनी बात
पति और उसके परिवार ने कई बार पंचायत स्तर पर समझौता कराने की कोशिश की। रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में भी दोनों को साथ लाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार नाकामी ही हाथ लगी। जनवरी 2024 में मेजर खुद अंबाला गया और पत्नी को समझाने की कोशिश की, लेकिन उसने साफ तौर पर उसके साथ रहने से इनकार कर दिया।
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कोर्ट में पेश हुए पुख्ता सबूत
मेजर ने कोर्ट में अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए कई सबूत पेश किए। इनमें व्हाट्सएप चैट, पेन ड्राइव में मौजूद डेटा और पंचायत के रिकॉर्ड शामिल थे। अदालत ने इन सभी साक्ष्यों को स्वीकार किया। इसके अलावा गवाहों और पुलिस काउंसलिंग रिकॉर्ड से भी यह साफ हुआ कि पत्नी लगातार पति के साथ रहने से इनकार कर रही थी।
पिता पर पड़ा गहरा असर, बिगड़ी तबीयत
इस पूरे मामले का असर परिवार पर भी पड़ा। मेजर के पिता ने कोर्ट में गवाही देते हुए बताया कि बहू के व्यवहार और घर में लगातार चल रहे विवादों की वजह से उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा। तनाव इतना बढ़ गया कि उनका ब्लड प्रेशर हाई हो गया और उन्हें लकवा मार गया। इसके चलते उनकी दाईं आंख की रोशनी भी चली गई।
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पत्नी के आरोप साबित नहीं हो पाए
पत्नी ने पति और उसके परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उसने कहा था कि उसके साथ मारपीट की गई और दहेज में 20 लाख रुपये की कार मांगी गई। लेकिन अदालत में इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। न तो कोई पुलिस शिकायत सामने आई और न ही कोई मेडिकल रिपोर्ट दी गई। यहां तक कि एक जन्मदिन के वीडियो में भी पत्नी सामान्य हालत में नजर आई, जिससे उसके आरोपों की सच्चाई पर सवाल खड़े हो गए।
कोर्ट का अंतिम फैसला
सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया कि यह मामला मानसिक क्रूरता का है। ऐसे में पति को इस विवाह से मुक्त किया जाना चाहिए। कोर्ट ने शादी को खत्म करते हुए तलाक की डिक्री दे दी। साथ ही भरण-पोषण (मेंटेनेंस) को लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया गया।
