#अपराध
May 8, 2026
हिमाचल : 44 साल में ही 'बुजुर्ग' हो गए लोग- डकार रहे थे वृद्ध पेंशन के पैसे, अब दर्ज हुई FIR
पूर्व के कई अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक फर्जीवाड़े के मामले ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां रोहड़ू क्षेत्र की तागनू-जांगलिख पंचायत में वृद्धावस्था पेंशन योजना में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि 44 से 54 साल उम्र के लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में बुजुर्ग दिखाकर पेंशन का लाभ दिलाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिमला जिला कल्याण विभाग को मिली शिकायत में आरोप था कि कई लोगों की उम्र सरकारी रिकॉर्ड में बढ़ाकर उन्हें बुजुर्ग दिखाया गया और इसके आधार पर वृद्धावस्था पेंशन का लाभ दिलाया गया।
जिसके बाद जब दस्तावेजों की जांच की गई तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। प्रारंभिक जांच में पता चला कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच पंचायत रिकॉर्ड और जन्म प्रमाण पत्रों में कथित बदलाव कर कई लोगों को पेंशन के लिए पात्र दर्शाया गया। मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी, उनकी वास्तविक उम्र 44 से 54 वर्ष के बीच बताई जा रही है। जांच में करीब 45 संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान हुई है। इनमें तांगणू गांव के 20 और जांगलिख गांव के 25 लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
इस सूची में 26 पुरुष और 19 महिलाएं हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई लोग वर्ष 2018-19 से ही पेंशन का लाभ उठा रहे हैं, जबकि कुछ को 2021 के बाद सूची में जोड़ा गया।
आरोप है कि पंचायत के परिवार रजिस्टर में छेड़छाड़ कर उम्र बढ़ाई गई, ताकि संबंधित लोगों को वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ मिल सके। कई ग्रामीणों का कहना है कि, पंचायत में इस तरह की गड़बड़ियों की चर्चा लंबे समय से चल रही थी।
कुछ लोगों को कई वर्षों से पेंशन मिल रही थी, जबकि कुछ नाम बाद में जोड़े गए। पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत थाना चिडग़ांव में केस दर्ज किया है। अब पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस और कल्याण विभाग की टीमें पंचायत रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र, पेंशन आवेदन और सत्यापन दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों को शक है कि बिना मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर रिकॉर्ड में बदलाव संभव नहीं था।
इसी कारण पंचायत के कुछ पूर्व कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने सरकारी योजनाओं की निगरानी और पंचायत स्तर पर दस्तावेजों की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।