मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। सरकाघाट उपमंडल के बड़ा समाहल गांव में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले 13 वर्षीय छात्र ने फंदा लगाकर अपनी जान दे दी है।

13 साल के छात्र ने की आत्महत्या

बताया जा रहा है कि छात्र ने ये खौफनाक कदम माता-पिता की डांट से दुखी होकर उठाया है। माता-पिता ने उसे खेलने के लिए मना किया था और पढ़ने के लिए कहा था। इसी बात से नाराज होकर उसने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

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परीक्षा देकर लौटा था घर

परिजनों के अनुसार, छात्र गुरुवार को अपनी वार्षिक परीक्षा देकर घर लौटा था। परीक्षा खत्म होने के बाद वह बाहर जाकर खेलने की तैयारी कर रहा था। उसी दौरान घरवालों ने उसे समझाया कि परीक्षा के बाद भी पढ़ाई पर ध्यान देना जरूरी है और समय खेल में बर्बाद न करे। इसी बात को लेकर उसे डांट भी लगाई गई और पढ़ाई करने के लिए कहा गया।

कमरे में जाकर उठाया बड़ा कदम

जानकारी के मुताबिक, बच्चे की मां उसे पढ़ाई करने की हिदायत देने के बाद रसोई में खाना बनाने चली गईं। परिवार के लोगों को लगा कि वह अपने कमरे में बैठकर पढ़ाई कर रहा होगा। करीब एक घंटे बाद जब मां नीचे कमरे में यह देखने पहुंचीं कि बेटा पढ़ रहा है या नहीं, तो दरवाजा खोलते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

 

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मां की निकली चीख

कमरे के अंदर उनका बेटा पंखे की कुंडी से लगे फंदे पर लटका हुआ था। यह दृश्य देखकर मां की चीख निकल गई। शोर सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी तुरंत मौके पर पहुंच गए। घर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और परिजन तुरंत बच्चे को नीचे उतारकर अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे।

इकलौते बेटे की मौत

परिवार के लोग बिना समय गंवाए बच्चे को तुरंत नागरिक अस्पताल सरकाघाट लेकर पहुंचे। वहां मौजूद चिकित्सकों ने उसकी जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इकलौते बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे गांव में शोक का माहौल फैल गया।

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पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों और आसपास के लोगों से बातचीत कर घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई है।

 

SP मंडी विनोद कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार परिजनों ने किसी भी प्रकार के संदेह की बात नहीं कही है। फिर भी पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

 

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बच्चों पर दबाव न बनाएं अभिभावक

इस घटना के बाद विशेषज्ञों ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी की मनोचिकित्सक डॉ. अनीता ठाकुर का कहना है कि परीक्षा का समय बच्चों के लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों पर अत्यधिक दबाव बनाने से बचना चाहिए।

खेलने का भी दें समय

उनका कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को खेलने और मानसिक रूप से आराम करने का भी अवसर मिलना चाहिए। खेल गतिविधियां बच्चों के दिमाग को तनाव से राहत देती हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को सही मार्गदर्शन देते हुए संतुलन बनाए रखना चाहिए, ताकि वे पढ़ाई और खेल दोनों को स्वस्थ तरीके से आगे बढ़ा सकें।

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