#अपराध
June 5, 2026
हिमाचल : अखबार वाले ने 15 वर्षीय लड़की का रे.ता गला, 4 साल चला केस- अब मिली उम्रकैद की सजा
सजा के साथ-साथ आसिफ को जुर्माना भी भरना होगा
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के प्राची राणा हत्याकांड मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। करीब चार वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी आसिफ मोहम्मद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इसी के साथ अदालत ने दोषी आसिफ मोहम्मद पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
मामला पांच अप्रैल 2022 का है, जब अंब के प्रताप नगर क्षेत्र में रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी प्राची राणा घर में अकेली थी। इसी दौरान आरोपी अखबार बांटने वाला आसिफ मोहम्मद जबरन घर में घुस गया और पेपर कटर से गला रेतकर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
घटना के समय प्राची के माता-पिता घर से बाहर गए हुए थे, जबकि उसकी छोटी बहन स्कूल में थी। जब परिवार के सदस्य घर लौटे तो उन्होंने प्राची को खून से लथपथ हालत में पाया। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सूचना मिलने के बाद पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की गई। पुलिस ने घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, वैज्ञानिक जांच और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई और उसे गिरफ्तार कर लिया।
जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और जबरन घर में घुसने सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 28 गवाह पेश किए। इन गवाहों में पुलिस अधिकारियों के अलावा मामले की जांच से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण लोग भी शामिल थे। गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और वैज्ञानिक तथ्यों को अदालत ने गंभीरता से परखा।
पीड़ित पक्ष की ओर से जिला न्यायवादी एकलव्य ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं। इसके बाद अदालत ने उसे हत्या का दोषी करार दिया।
फैसले के तहत अदालत ने BNS की धारा 302 के अंतर्गत दोषी को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
इसके अलावा धारा 201 के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में तीन वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 452 के तहत जबरन घर में प्रवेश करने के अपराध में भी तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
यह मामला उस समय पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया था। घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया था और विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक संगठनों ने दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी। कई संगठनों ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किए थे।