सोलन। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम HRTC की इलेक्ट्रिक बस इन दिनों अपने तकनीकी फीचर्स से ज्यादा अजीबोगरीब कारणों से चर्चा में रही। यह e-बस सोलन पहुंचते ही ट्रायल से पहले ही सुर्खियों में आ गई। वजह यह रही कि बस पूरे तीन दिन तक ट्राले से उतरे बिना सोलन शहर में इधर-उधर घूमती रही और अधिकारी उसे उतारने के लिए शुभ मुहूर्त का इंतजार करते रहे।
तीन दिन ट्राले में घूमती रही बस
सोमवार की शाम करीब छह बजे हैदराबाद से ट्राले में लदी यह इलेक्ट्रिक बस सोलन पहुंची थी। इसके बाद बस को HRTC की वर्कशॉप परिसर में खड़ा किया गया, लेकिन वहां बस उतारने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिला।
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बिना चाबी के भेजी दी बस
इसके चलते अगले दिन बस को सेब मंडी क्षेत्र के पास खड़ा कर दिया गया। यहां भी बस को ट्राले से उतारने की तैयारी हुई, लेकिन तभी एक नई परेशानी सामने आ गई। दरअसल, कंपनी ने इलेक्ट्रिक बस तो सोलन भेज दी, लेकिन उसके साथ बस की चाबी भेजना ही भूल गई।
क्या सच में था कोई शुभ मुहूर्त?
जब अधिकारियों ने बस उतारने के लिए चाबी मांगी तो पता चला कि चाबी मौजूद ही नहीं है। इससे निगम अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। इसी बीच निगम के उच्चाधिकारियों की ओर से यह भी निर्देश बताए जा रहे थे कि बस को शुभ मुहूर्त से पहले ट्राले से न उतारा जाए।
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बस देखने पहुंचे कई लोग
नतीजतन, इलेक्ट्रिक बस तीन दिन तक ट्राले पर ही लदी रही और कभी सेब मंडी तो कभी वर्कशॉप के आसपास खड़ी नजर आई। तीन दिन तक ट्राले पर खड़ी इस नई e-बस को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सेब मंडी क्षेत्र पहुंचे।
हर तरफ हुई खूब चर्चा
कोई इसे भविष्य की बस बता रहा था तो कोई इसे व्यवस्था की कमजोरी का उदाहरण मान रहा था। जब बाद में यह सामने आया कि बस के साथ चाबी ही नहीं आई थी, तो यह मामला और भी ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।
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हवाई जहाज से भेजी चाबी
चाबी न होने की समस्या को दूर करने के लिए निगम ने तुरंत बस निर्माता कंपनी से संपर्क किया। इसके बाद कंपनी ने हैदराबाद से बस की चाबी हवाई जहाज के जरिए भेजी। चाबी पहले चंडीगढ़ पहुंची और वहां से देर शाम सोलन लाई गई। चाबी मिलने के बाद आखिरकार बस को ट्राले से उतारा गया, तब जाकर अधिकारियों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।
बस को ट्रायल के लिए भेजा
इसके बाद इलेक्ट्रिक बस का ट्रायल भी शुरू कर दिया गया। पहले दिन सोलन से अर्की वाया ममलीग रूट पर बस को चलाया गया। इस दौरान निगम और कंपनी के तकनीकी अधिकारियों की मौजूदगी में बस की पूरी जांच की गई।
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हर चीज की बारीकी से जांच
बस को फुल चार्ज करने के बाद यह देखा गया कि-
- एक बार चार्ज करने पर बस कितनी दूरी तय करती है।
- पहाड़ी रास्तों पर इसका प्रदर्शन कैसा रहता है।
- ब्रेक, पिकअप व अन्य तकनीकी सिस्टम किस तरह काम करते हैं।
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HRTC के बेड़े में e-बसें
निगम अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक बस के अन्य रूटों पर भी ट्रायल किए जाएंगे। सभी ट्रायल पूरे होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया जाएगा कि भविष्य में HRTC के बेड़े में कितनी इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएंगी।
अधिकारियों के सुर बदले
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर निगम अधिकारियों के सुर भी बदलते नजर आए। चाबी न होने और शुभ मुहूर्त की बातों पर उठे सवालों के बीच अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि सुरक्षा कारणों से बस को ट्राले पर ही सुरक्षित स्थानों पर खड़ा किया गया था।
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HRTC सोलन के क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि इलेक्ट्रिक बस को अब ट्राले से उतार दिया गया है और इसका ट्रायल शुरू हो चुका है। वीरवार को सोलन से अर्की रूट पर सफल ट्रायल किया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रायल के सभी पहलुओं का आकलन किया जा रहा है।
