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January 8, 2026

हिमाचल: खुले आसमान के नीचे लंगर चला रहे वेहले बॉबी, अस्पताल ने नहीं दी जगह- हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

चमियाणा अस्पताल को तुरंत जगह देने के आदेश

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high court himachal

शिमला। जब सिस्टम की सुविधाएं थक जाती हैं, तब कई बार इंसानियत खुद रास्ता बना लेती है। शिमला के चमियाणा सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में बीते दिनों से एक नाम लगातार सुर्खियों में हैवेहले बॉबी यानी सरबजीत सिंह बॉबी। सालों से कैंसर अस्पतालों और बड़े चिकित्सा केंद्रों में मरीजों व तीमारदारों के लिए नि:शुल्क लंगर चलाने वाले बॉबी की सेवा इन दिनों खुले आसमान के नीचे चल रही थी। ठंड, धुंध और सर्द हवाओं के बीच सड़क किनारे बैठकर खाना खा रहे मरीजों को देखकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और अब अदालत ने अस्पताल प्रशासन को सीधे निर्देश दे दिए हैं।

तुरंत जगह उपलब्ध करवाने के आदेश

हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला से करीब 15 किलोमीटर दूर अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशिएलिटी (AIMSS) चमियाणा में लंगर संचालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अस्पताल प्रशासन को आदेश दिए हैं कि ऑलमाइटी ब्लेसिंग्स संस्था को मरीजों और तीमारदारों के लिए लंगर चलाने हेतु तुरंत उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए।

 

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हाईकोर्ट ने साफ किया है कि अगली सुनवाई से पहले यदि संस्था को अस्थायी रूप से भी जगह नहीं दी गई, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर जवाब देना होगा।

खुले आसमान के नीचे चल रही थी सेवा

अदालत को बताया गया कि सरबजीत सिंह बॉबी की संस्था लंबे समय से चमियाणा अस्पताल में नि:शुल्क भोजन उपलब्ध करवा रही है। लेकिन अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार की व्यवस्था न होने के कारण लोग कड़ाके की ठंड में खुले में बैठकर भोजन करने को मजबूर थे। इसी मुद्दे को हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया।

 

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कोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन को लगाई फटकार

इस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि सेवा कार्य में अड़चन बनना अमानवीय है और इसे तुरंत सुधारा जाए।

अगली सुनवाई तक जगह देने के आदेश

अदालत ने निर्देश दिए हैं कि मामले की अगली सुनवाई से पहले संस्था को ऐसी जगह दी जाए, जहां मरीज और उनके परिजन सम्मानजनक तरीके से बैठकर भोजन कर सकें। कोर्ट ने कहा कि यह केवल लंगर का नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा का प्रश्न है।

 

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अस्पताल की कमियों पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता बिमल गुप्ता ने अस्पताल से जुड़ी कई गंभीर कमियां भी कोर्ट के सामने रखीं। इसमें चमियाणा अस्पताल के लिए शहर में साइन बोर्ड न होना, सड़क मार्ग का संकरा होना, पार्किंग की भारी कमी और सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का अभाव शामिल है।

 

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हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि सड़क चौड़ीकरण, स्ट्रीट लाइट, बिजली लाइनों के स्थानांतरण और पार्किंग व्यवस्था को लेकर तय समयसीमा में कार्रवाई की जाए। साथ ही एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक को भी हलफनामा दायर करने के आदेश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च तय की है।

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