#अव्यवस्था
May 22, 2026
हिमाचल: लोगों की सेहत से खिलवाड़, घटने की वजाय बढ़ रही बीमारी; बेअसर निकली 120 दवाएं
कफ सिरप और इंजेक्शन भी फेल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ का मामला लगातार सामने आता रहा है। हर महीने किसी न किसी दवा का सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल हो जाता है, जिससे दवा कंपनियों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। अब एक बार फिर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल महीने के ड्रग अलर्ट में देशभर की 120 दवाइयों के सैंपल फेल पाए गए हैं, जिनमें हिमाचल प्रदेश में बनी 31 दवाएं भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में बनी 31 दवाइयां जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इसके अलावा उत्तराखंड की 24 और गुजरात की 20 दवाओं के सैंपल भी फेल पाए गए हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि जिन दवाओं के सैंपल खराब निकले हैं, उनमें कई ऐसी दवाइयां शामिल हैं जो गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। इनमें दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर, शुगर, मिर्गी, सिरदर्द और संक्रमण से जुड़ी दवाइयां शामिल हैं।
ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि खराब निकली दवाओं में 13 कफ सिरप और 18 इंजेक्शन भी शामिल हैं। यानी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दवाओं से लेकर गंभीर बीमारियों में दी जाने वाली मेडिसिन तक में गड़बड़ी मिली है। इसके अलावा आयरन की गोलियां, विटामिन टैबलेट, कुछ पाउडर और मेहंदी कोन भी गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गुणवत्ता वाली दवाएं मरीजों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकती हैं। कई बार मरीज लंबे समय तक दवा लेते रहते हैं लेकिन बीमारी में सुधार नहीं होता, जिसकी एक वजह दवा की गुणवत्ता भी हो सकती है। यही कारण है कि CDSCO समय-समय पर बाजार से दवाओं के सैंपल लेकर उनकी जांच करता है।
अप्रैल की रिपोर्ट में हिमाचल, उत्तराखंड और गुजरात के अलावा कई अन्य राज्यों की दवाइयां भी फेल हुई हैं। तेलंगाना की 7, सिक्किम की 5, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और महाराष्ट्र की 4-4 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में असफल रहे। वहीं पंजाब, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु की 3-3 दवाइयां भी मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं। पुडुचेरी की 2 और बिहार व पश्चिम बंगाल की 1-1 दवा का सैंपल भी फेल पाया गया है।
अगर पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह मामला लगातार चिंता बढ़ाने वाला नजर आ रहा है। मार्च महीने में 141 दवाइयों के सैंपल फेल पाए गए थे, जिनमें हिमाचल की 47 दवाइयां शामिल थीं। फरवरी में 198 और जनवरी में 218 दवाइयां गुणवत्ता जांच में फेल हुई थीं। जनवरी में हिमाचल की 71 दवाइयां खराब निकली थीं, जबकि फरवरी में यह संख्या 73 तक पहुंच गई थी।