#अव्यवस्था
May 20, 2026
हिमाचल में किसान-बागवानों को महंगाई का झटका- खाद के दामों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, अब इस रेट में मिलेगी
किसानों-बागवानों को सता रही फसलों की चिंता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसानों को बड़ा झटका लगा है। इस बार किसानों को डीएपी और एनपीके खाद के लिए पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
हिमाचल सरकार की ओर से प्रति बोरी 50 रुपये अतिरिक्त सब्सिडी जारी रखने को लेकर अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जिसके चलते खाद की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
उर्वरक सहकारी संस्था इफको के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि नया खाद स्टॉक अब बढ़ी हुई दरों पर ही किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। खाद के दामों में इजाफा होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
प्रदेश सरकार पिछले वर्ष किसानों को राहत देने के उद्देश्य से DAP और NPK खाद पर प्रति बोरी 50 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दे रही थी। इस राहत के कारण किसानों को खाद कम कीमत पर उपलब्ध हो रही थी और खेती की लागत कुछ हद तक नियंत्रित रहती थी।
मगर इस वर्ष अब तक सरकार की ओर से सब्सिडी जारी रखने को लेकर कोई नया फैसला सामने नहीं आया है। यही कारण है कि इफको ने बिना सब्सिडी के नई कीमतों पर खाद बेचने की तैयारी कर ली है।
नई दरों के अनुसार, खाद की कीमत में भी प्रति बोरी 50 रुपये तक की बढ़ोतरी होने जा रही है। यानी-
खाद के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ने की संभावना है। खरीफ सीजन में धान, मक्का और अन्य फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को बड़ी मात्रा में उर्वरकों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में लागत बढ़ने से किसानों की आर्थिक चिंता भी बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, IFCO को पिछले वर्ष की सब्सिडी राशि का भुगतान भी अभी तक नहीं मिला है। लगातार लंबित भुगतान और सरकार की ओर से नए आदेश जारी न होने के कारण संस्था के लिए पुराने रेट पर खाद उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है।
बताया जा रहा है कि अगर जल्द ही कोई फैसला नहीं लिया गया तो आने वाले समय में किसानों को और अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है। कई किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत, मौसम की मार और उत्पादन खर्च से परेशान हैं।
डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि खाद पर मिलने वाली सब्सिडी को लेकर पिछले वर्ष की राशि अभी भी लंबित है। उन्होंने कहा कि सरकार और उच्च अधिकारियों से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार आगे कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, किसानों की नजर अब प्रदेश सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। अगर सरकार जल्द सब्सिडी को लेकर कोई घोषणा नहीं करती- तो खरीफ सीजन में खेती की लागत और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ेगा।