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January 8, 2026

हिमाचल के ड्राइवर ने स्कूल बस में मासूम संग की नीचता, कोर्ट ने सुनाई 25 साल की सजा

बच्ची को पांच साल बाद मिला इंसाफ

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 child abuse case

सोलन। हिमाचल और आसपास के पहाड़ी राज्यों में बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराध न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर देते हैं। मासूम उम्र में जिस भरोसे के साथ बच्चे स्कूल की बस में बैठते हैं, वही भरोसा जब टूटता है तो उसका दर्द सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहता। ऐसे मामलों में अदालतों से आने वाले फैसले केवल सजा नहीं होते, वे समाज को यह संदेश भी होते हैं कि बच्चियों के खिलाफ अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

4 साल की बच्ची को बनाया शिकार

पंचकूला की विशेष पोक्सो अदालत ने साल 2020 के एक दिल दहला देने वाले मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने चार साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी स्कूल बस चालक को 25 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

 

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सोलन का रहने वाला आरोपी चालक

यह मामला फरवरी 2020 का है। हरियाणा के पंचकूला जिले के पिंजौर क्षेत्र में रहने वाली चार वर्षीय बच्ची रोज़ की तरह स्कूल जाने के लिए बस में बैठी थी। आरोपी निरंजन उर्फ हनी, जो मूल रूप से जिला सोलन का निवासी बताया गया है, उस समय स्कूल बस का चालक था। आरोप है कि इसी दौरान उसने मासूम बच्ची के साथ घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

 

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पेट दर्द से उजागर हुई सच्चाई

जानकारी के मुताबिक बच्ची अपनी मौसी के साथ स्कूल जाती थी। 14 फरवरी की सुबह करीब पौने आठ बजे बच्ची को बस में स्कूल भेजा गया। दोपहर के समय बच्ची को अचानक पेट में तेज दर्द हुआ। जब मौसी ने वजह पूछी तो बच्ची ने रोते हुए बताया कि बस चालक ने उसके साथ गलत हरकत की है। परिजन बिना देर किए बच्ची को सेक्टर-6 पंचकूला के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे।

मेडिकल जांच में पुष्टि, तुरंत गिरफ्तारी

अस्पताल में डॉक्टरों की जांच के बाद दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बाद मौसी की शिकायत पर पंचकूला पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट, बच्ची के बयान और अन्य तकनीकी सबूत जुटाए।

 

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अदालत में सबूतों ने दिलाई सजा

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मेडिकल साक्ष्य, बच्ची का बयान और परिस्थितिजन्य प्रमाण पेश किए। इन सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एडवोकेट सुखविंदर कौर ने अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी की।

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