सिरमौर। सीमित संसाधनों के बीच भी अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। यह 21 वर्ष की कम उम्र में SSB जैसी प्रतिष्ठित अर्धसैनिक सेवा में चयनित होकर नाहन के विनीत ने यही साबित कर दिखाया है।
21 की उम्र में SSB में चयन
यह उपलब्धि केवल एक सरकारी नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सोच की जीत है, जिसमें मेहनत, अनुशासन और सही दिशा का मेल हो। विनीत ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय उन्होंने अपने पिता सुरेंद्र सिंह और माता पुष्पा देवी के आशीर्वाद को दिया है।
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किसको दिया सफलता का श्रेय?
विनीत का कहना है कि कठिन समय में माता-पिता का विश्वास और संस्कार ही उनका सबसे बड़ा संबल बने। इसके साथ ही भाई का निरंतर सहयोग, गुरुजनों का मार्गदर्शन और मित्रों का हर कदम पर उनके साथ रहा। उन्होंने बताया कि जब भी तैयारी के दौरान आत्मविश्वास डगमगाया, तब परिवार और शिक्षकों की सीख ने उन्हें फिर से लक्ष्य की ओर मोड़ दिया।
मोबाइल बना डिजिटल लाइब्रेरी
इस सफलता की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने महंगे कोचिंग संस्थानों या बड़े शहरों का रुख नहीं किया। मोबाइल फोन को ही उन्होंने अपनी “डिजिटल लाइब्रेरी” बना लिया।YouTube पर उपलब्ध मुफ्त शैक्षणिक वीडियो, ऑनलाइन मॉक टेस्ट, इंटरव्यू टिप्स और फिजिकल ट्रेनिंग से जुड़े कंटेंट का उन्होंने बेहद संतुलित और अनुशासित उपयोग किया।
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इंटरनेट आज सिर्फ मनोरंजन नहीं
उनका मानना है कि इंटरनेट आज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सही इस्तेमाल किया जाए तो यह किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं। SSB जैसी कठिन और बहुआयामी परीक्षा की तैयारी उन्होंने ऑनलाइन संसाधनों और स्वयं की मेहनत से पूरी की।
अनुशासन और आत्मविश्वास की परीक्षा
SSB की चयन प्रक्रिया केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें शारीरिक क्षमता, मानसिक संतुलन, नेतृत्व गुण और व्यक्तित्व की भी गहन परीक्षा होती है। उन्होंने अपनी दिनचर्या को बेहद अनुशासित रखा- सुबह की फिजिकल ट्रेनिंग, दिन में पढ़ाई और शाम को आत्ममूल्यांकन।
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नहीं भटकने दिया ध्यान
विनीत ने मोबाइल का उपयोग भी सीमित और उद्देश्यपूर्ण रखा, ताकि ध्यान भटके नहीं। उनका कहना है कि असफलता के डर से नहीं, बल्कि सीखने की भावना से हर चुनौती का सामना किया। 21 साल की उम्र में देश सेवा से जुड़ना अपने आप में गौरव की बात है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
खासकर ग्रामीण और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों के युवाओं के लिए यह कहानी एक मजबूत संदेश देती है कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह नहीं रोक सकती। उनकी सोच साफ है सफलता केवल साधनों से नहीं, बल्कि सही दिशा में की गई कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य से मिलती है।
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गांव और परिवार में खुशी का माहौल
इस उपलब्धि के बाद परिवार और गांव में खुशी और गर्व का माहौल है। रिश्तेदारों, दोस्तों और शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है। सभी को विश्वास है कि वह आने वाले समय में न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।
उज्ज्वल भविष्य की कामना
यह सफलता केवल एक शुरुआत है। देश सेवा के पथ पर उनका यह पहला कदम आने वाले वर्षों में और भी ऊंचाइयों तक पहुंचे, यही कामना हर किसी के मन में है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, सही मार्गदर्शन और डिजिटल साधनों का सकारात्मक उपयोग किसी भी साधारण युवा को असाधारण उपलब्धि तक पहुंचा सकता है।
