#अपराध
January 21, 2026
हिमाचल में उप प्रधान ने जिस नागा साधु की जबरन काटी जटाएं- आज उसी के पैरों में पड़कर मांगी माफी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही साधु की वीडियो
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में साधु के साथ मारपीट और जबरन दाढ़ी व जटाएं काटे जाने के मामले ने अब एक नया और अहम मोड़ ले लिया है। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद जहां पूरे इलाके में आक्रोश, तनाव और तीखी बहस का माहौल बन गया था। वहीं अब दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया है।
मामले में सबसे अहम घटनाक्रम तब सामने आया, जब संगड़ाह क्षेत्र के पंचायत उपप्रधान ने ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में पीड़ित साधु के पैर छूकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
पंचायत उपप्रधान ने कहा कि साधु महात्मा के साथ जो भी व्यवहार हुआ, वह अनजाने में और गलत परिस्थितियों में हुआ। इसके लिए वह न केवल साधु से, बल्कि पूरे साधु समाज और अखाड़े से भी क्षमा मांगते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साधु महात्मा द्वारा शराब या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन किए जाने की बात पूरी तरह निराधार थी। पंचायत उपप्रधान के इस बयान के बाद विवाद से जुड़े कई भ्रम भी दूर हुए।
यह मामला पुलिस थाना संगड़ाह क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिंयू गांव से जुड़ा हुआ है। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें एक साधु के साथ मारपीट की जा रही थी और उसकी दाढ़ी व जटाएं काटी जा रही थीं।
वीडियो सामने आते ही धार्मिक भावनाओं से जुड़ा यह मामला चर्चा में आ गया और क्षेत्र के साथ-साथ प्रदेशभर में लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। वीडियो के बाद पीड़ित साधु प्रवेश गिरि ने 17 जनवरी को थाना संगड़ाह में शिकायत दर्ज करवाई थी।
उन्होंने बताया था कि वह बीते कई वर्षों से उसी गांव में रह रहे हैं और शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे। साधु का आरोप था कि पंचायत उपप्रधान सहित कुछ ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की और जबरन उनकी दाढ़ी व जटाएं काट दीं, जो उनकी धार्मिक पहचान और आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं।
साधु प्रवेश गिरि ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया था कि घटना के बाद उन पर मामला वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें धमकियां भी दी जा रही हैं। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों पर हमला बताया था।
वहीं, दूसरी ओर पंचायत उपप्रधान सतपाल तोमर ने साधु के आरोपों को सिरे से नकारते हुए दावा किया था कि घटना वाले दिन साधु कथित रूप से नशे की हालत में गांव में हंगामा कर रहे थे, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई थी। पंचायत उपप्रधान की ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई थी।
दोनों पक्षों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने क्रॉस एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस स्तर पर मामले की पड़ताल चल रही थी और वीडियो, बयानों व परिस्थितियों के आधार पर तथ्य जुटाए जा रहे थे। इस बीच मामला संवेदनशील होने के कारण प्रशासन भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए था।
हालांकि बढ़ते तनाव को देखते हुए पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने पहल करते हुए दोनों पक्षों के बीच बातचीत करवाई। लंबी चर्चा और समझाइश के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने पर राजी हो गए। सार्वजनिक माफी और गलतफहमियों के समाधान के बाद दोनों पक्षों ने भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचने का आश्वासन दिया।
समझौते के बाद संगड़ाह क्षेत्र में अब शांति का माहौल है। प्रशासन और पुलिस भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। स्थानीय लोगों का कहना है कि आपसी संवाद और समझदारी से बड़े से बड़ा विवाद भी सुलझाया जा सकता है, और यही संदेश इस पूरे घटनाक्रम से सामने आया है।