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May 10, 2026
10TH Result: मिस्त्री की बेटी ने 99.29 % अंक हासिल कर पाया 5वां स्थान, इंजीनियर बनना है सपना
पिता करते हैं मिस्त्री का काम, मां सिलती है कपड़े, बेटी ने चमकाया नाम
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रोहड़ू/शिमला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम ने इस बार यह साबित कर दिया कि सफलता पैसों या बड़े संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो तो साधारण परिवारों के बच्चे भी बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं। इस साल की मेरिट सूची में ऐसे कई नाम चमक रहे हैं, जिनके पास न तो बड़े साधन थे और न ही ऐश-ओ-आराम की जिंदगी, फिर भी उन्होंने अपनी मेधा से पूरे प्रदेश को गौरवान्वित कर दिया है।
शिमला जिले के रोहड़ू की रहने वाली साक्षी कुमारी ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश मेरिट सूची में पांचवां स्थान हासिल किया है। राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल रोहड़ू की छात्रा साक्षी ने 700 में से 695 अंक प्राप्त किए। साक्षी एक साधारण परिवार से संबंध रखती हैं। उनकी मां रंजू देवी सिलाई का काम करती हैं] जबकि पिता भूपेंद्र शर्मा राजमिस्त्री हैं। परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश से जुड़ा है, लेकिन रोजगार के चलते लंबे समय से रोहड़ू में रह रहा है।
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साक्षी की मां अपनी बेटी की सफलता पर भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि परिवार ने हमेशा बेटी को पढ़ने का माहौल दिया, लेकिन कभी अंक लाने का दबाव नहीं बनाया। उनके मुताबिक साक्षी खुद पढ़ाई को लेकर गंभीर रहती थी और हमेशा मेहनत करती थी। सीमित आय और साधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।
साक्षी ने बताया कि वह नियमित टाइम-टेबल बनाकर पढ़ाई करती थीं। उन्हें उम्मीद थी कि अच्छे अंक आएंगे, लेकिन प्रदेश की मेरिट सूची में स्थान बनाना उनके लिए सपने जैसा था। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया। भविष्य में वह नॉन-मेडिकल विषय लेकर इंजीनियर बनना चाहती हैं।
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रोहड़ू में ही रहने वाली रमनप्रीत ने भी प्रदेशभर में आठवां स्थान हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल रोहड़ू की छात्रा रमनप्रीत ने 700 में से 692 अंक प्राप्त किए। उनके पिता कुलदीप चंद व्यवसाय करते हैं और परिवार मूल रूप से ऊना जिले से संबंध रखता है। रमनप्रीत ने कहा कि वह अपने परिणाम से खुश हैं और भविष्य में इंजीनियर बनकर परिवार और प्रदेश का नाम रोशन करना चाहती हैं। पढ़ाई के साथ उन्हें भाषण प्रतियोगिताओं में भी विशेष रुचि है।
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इस बार के बोर्ड परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि सफलता केवल बड़े स्कूलों और सुविधाओं तक सीमित नहीं है। मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से कोई भी छात्र ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। साक्षी और रमनप्रीत जैसी बेटियों की कहानियां आज उन हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।