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May 19, 2026
विदेश में गूंजा हिमाचल के सरकारी स्कूल का नाम : छात्रों ने बनाया बांधों का खास मॉडल, पाया पहला स्थान
इंडोनेशिया में छात्रों ने अपने मॉडल का प्रदर्शन किया- 20 देशों को पछाड़ा
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के विद्यार्थियों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा अंतरराष्ट्रीय मंच पर मनवाया है। राजकीय बीजे वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मंडी के दो छात्रों द्वारा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव को लेकर तैयार किए गए मॉडल की हर ओर चर्चा हो रही है।
छात्रों का ये स्मार्ट डैम मॉनिटरिंग एंड प्रोटेक्शन सिस्टम” मॉडल इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मॉडल प्रदर्शनी में प्रथम स्थान हासिल करने में सफल रहा। इस उपलब्धि के बाद पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है और विद्यालय परिवार को विद्यार्थियों पर गर्व महसूस हो रहा है।
आपको बता दें कि यह मॉडल 16 मई से जकार्ता में शुरू हुई “कोडएवर 7.0” अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में “आउट ऑफ द बॉक्स आइडिया” श्रेणी में शामिल किया गया था। प्रतियोगिता में दुनिया के करीब 20 देशों के नवाचार आधारित मॉडल प्रस्तुत किए गए थे। मगर हिमाचल के छात्रों ने अपने अनोखे विचार और वैज्ञानिक प्रस्तुति से सभी को प्रभावित करते हुए पहला स्थान अपने नाम कर लिया।
इस मॉडल को जमा एक के छात्र ऋषभ ठाकुर और शिवांश कश्यप ने तैयार किया है। दोनों विद्यार्थियों ने अपने विज्ञान शिक्षक हेमंत शर्मा के मार्गदर्शन में कई महीनों तक मेहनत कर इस परियोजना को तैयार किया।
प्रतियोगिता में छात्रों ने न केवल तकनीकी जानकारी दी बल्कि यह भी समझाया कि यह मॉडल भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किस प्रकार बड़े नुकसान को रोक सकता है। दोनों छात्र अपने शिक्षक हेमंत शर्मा के साथ इंडोनेशिया गए थे।

इंडोनेशिया में उन्होंने अपने मॉडल का लाइव प्रदर्शन किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय जजों ने बेहद सराहा। विद्यार्थियों की प्रस्तुति, आत्मविश्वास और मॉडल की उपयोगिता ने निर्णायकों को प्रभावित किया और अंततः यह मॉडल प्रथम स्थान पर रहा।
इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि इसे किसी किताब या इंटरनेट से प्रेरित होकर नहीं- बल्कि हिमाचल में हुई वास्तविक त्रासदी से सीख लेकर तैयार किया गया है। जून 2025 में मंडी जिला के सराज क्षेत्र के पटीकरी में बांध टूटने की घटना ने भारी तबाही मचाई थी। गोहर और सराज के कई इलाकों में लोगों को नुकसान उठाना पड़ा था।
इसी घटना ने छात्रों को सोचने पर मजबूर किया कि आखिर ऐसा कौन सा सिस्टम बनाया जाए जिससे समय रहते खतरे का पता लगाया जा सके और बड़े हादसों को रोका जा सके। इसी सोच से “स्मार्ट डैम मॉनिटरिंग एंड प्रोटेक्शन सिस्टम” का जन्म हुआ।
विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया गया यह मॉडल पूरी तरह सेंसर आधारित तकनीक पर काम करता है। इसमें एक विशेष अलार्मिंग सिस्टम लगाया गया है- जो पानी के स्तर और बारिश की मात्रा पर लगातार नजर रखता है।
जैसे ही नदी या बांध में पानी का स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचता है, सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है। इसके बाद बांध के गेट अपने आप खुल जाते हैं ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके और बांध पर दबाव कम हो जाए।
इससे बांध टूटने जैसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। मॉडल में वर्षा मापने के लिए विशेष रेन सेंसर भी लगाए गए हैं, जो यह जानकारी देते हैं कि आसपास के क्षेत्र में कितनी बारिश हो रही है। इसके अलावा अल्ट्रासोनिक सेंसर पानी के स्तर को लगातार मापता रहता है। यदि जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो सिस्टम पहले ही चेतावनी जारी कर देता है।
भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता हेमंत शर्मा ने बताया कि इस मॉडल को तैयार करने में करीब आठ से दस हजार रुपये का खर्च आया। इसमें आर्डयूनो यूनो, पीआर सेंसर, रेन डिटेक्टिंग सेंसर और अल्ट्रासोनिक सेंसर जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है।
उन्होंने बताया कि यह मॉडल केवल विज्ञान प्रदर्शनी के लिए नहीं बल्कि भविष्य में वास्तविक परिस्थितियों में भी उपयोगी साबित हो सकता है। अगर इसे बड़े स्तर पर विकसित किया जाए तो यह पहाड़ी राज्यों में आने वाली बाढ़ और बांध संबंधी आपदाओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इस मॉडल की सफलता का सफर स्कूल स्तर से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत आयोजित ऑनलाइन मॉडल प्रदर्शनी में विद्यालय के दो मॉडल चुने गए थे। इसके बाद शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में इस मॉडल ने अपनी अलग पहचान बनाई।
राज्य स्तर पर चयनित होने के बाद इसे राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए बेंगलुरु भेजा गया। वहां इस मॉडल को “बेस्ट फ्यूचर शेपर्स अवार्ड” मिला। इसी प्रतियोगिता में इसे इंडोनेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मॉडल प्रदर्शनी के लिए चुना गया था।
विद्यार्थियों की इस उपलब्धि के बाद विद्यालय में खुशी और उत्साह का माहौल है। प्रधानाचार्य अशोक शर्मा ने कहा कि यह सम्मान केवल विद्यालय ही नहीं बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और देश के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और सरकारी स्कूलों के बच्चे भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने समग्र शिक्षा हिमाचल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को सही मंच मिलने से उनकी प्रतिभा दुनिया के सामने आई है।