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May 11, 2026

हिमाचल: मां-बाप का साया उठा फिर भी नहीं टूटी श्रुति, कड़ी मेहनत से 10वीं में जिला की टॉपर बनी

दादा-दादी ने दिखाई राह, बड़ी बहन ने अपनी छात्रवृत्ति से भरी फीस 

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नालागढ़ (सोलन)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा बीते रोज घोषित किए गए 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में प्रदेशभर के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने मेरिट सूची में जगह बनाई। इन होनहार छात्रों में कई ऐसे चेहरे भी शामिल रहे, जिन्होंने आर्थिक तंगी, पारिवारिक परेशानियों और विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए सफलता हासिल की। इन्हीं संघर्षशील कहानियों में एक नाम सोलन जिला के नालागढ़ क्षेत्र की बेटी श्रुति का भी है, जिसने जिंदगी के गहरे दुखों को पीछे छोड़कर प्रदेश की मेरिट सूची में चौथा स्थान हासिल कर हर किसी का दिल जीत लिया।

बचपन में मां, दो साल पहले पिता की मौत

श्रुति की सफलता केवल अंकों की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल बनकर सामने आई है। बचपन में मां को खो देने वाली श्रुति पर दो साल पहले उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा] जब वर्ष 2024 में सांप के काटने से उसके पिता की भी मौत हो गई। माता-पिता दोनों का साया सिर से उठ जाने के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया] लेकिन श्रुति ने हार मानने की बजाय अपने सपनों को ताकत बनाया।

 

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दादा-दादी बने सहारा, बहन ने निभाई जिम्मेदारी

नालागढ़ क्षेत्र के गोयला बस्सी गांव की ढकरियाना पंचायत से संबंध रखने वाली श्रुति की परवरिश अब उसके बुजुर्ग दादा-दादी कर रहे हैं। 72 वर्षीय दादा रामस्वरूप खेती-बाड़ी कर परिवार का गुजारा चलाते हैं, जबकि दादी कौशल्या देवी घर संभालती हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद उन्होंने अपनी पोती की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी।

श्रुति की बड़ी बहन प्रिया ठाकुर भी उसके लिए प्रेरणा बनीं। प्रिया को मिलने वाली छात्रवृत्ति से ही श्रुति की स्कूल फीस और पढ़ाई का खर्च पूरा होता रहा। खुद 12वीं पास कर कॉलेज में पढ़ाई कर रही प्रिया ने छोटी बहन का मनोबल कभी टूटने नहीं दिया।

 

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रात देर तक पढ़ाई] सुबह जल्दी करती थी रिविजन

श्रुति ने बताया कि उसने शुरू से ही पढ़ाई को अपनी जिंदगी बदलने का जरिया माना। वह रात का खाना खाने के बाद देर रात तक पढ़ाई करती थी और सुबह जल्दी उठकर दोबारा रिविजन करती थी। कठिन हालात के बावजूद उसने खुद को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।

 

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उसकी मेहनत रंग लाई और उसने 696 अंक हासिल कर हिमाचल प्रदेश की मेरिट सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया। गांव और स्कूल में श्रुति की इस उपलब्धि पर खुशी का माहौल है। लोग उसकी मेहनत और हिम्मत की सराहना कर रहे हैं।

वकील बनकर करना चाहती है बड़ा मुकाम हासिल

श्रुति ने अपनी सफलता का श्रेय दादा-दादी, बहन और शिक्षकों को दिया है। उसने कहा कि परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उसे हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। भविष्य को लेकर श्रुति के सपने भी बड़े हैं। वह आगे चलकर वकील बनना चाहती है ताकि समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद कर सके। इसके लिए उसने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नालागढ़ में 11वीं कक्षा में प्रवेश ले लिया है।

 

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श्रुति की यह कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। उसने साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता की राह खुद बन जाती है।

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