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May 10, 2026
10TH Result: मां-बाप का छूटा साथ, फिर भी नहीं हारी राघवी; 690 अंक लेकर मेरिट में पाया स्थान
दादी ने कड़ी मेहनत कर पोती को पढ़ाया, राघवी ने मेरिट में हासिल किया 10वां स्थान
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में इस बार हजारों विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की। कई छात्रों ने मेरिट सूची में अपनी जगह बनाई, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो केवल अंक नहीं, बल्कि संघर्ष, हौसले और जज्बे की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही कहानी है हमीरपुर जिले के खास गलोर गांव की बेटी राघवी की, जिसने जिंदगी की कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए प्रदेश मेरिट में 10वां स्थान हासिल किया है।
राघवी की सफलता इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि उसके सिर से माता और पिता दोनों का साया उठ चुका है। कम उम्र में ही जिंदगी ने उसे ऐसे दुख दिए] जिन्हें सह पाना किसी बच्चे के लिए आसान नहीं होता। लेकिन राघवी ने हालात के आगे हार नहीं मानी। परिवार की बुजुर्ग दादी ने उसे संभाला] हिम्मत दी और पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद राघवी लगातार मेहनत करती रही। आज उसी मेहनत का परिणाम है कि उसने 700 में से 690 अंक हासिल कर पूरे हिमाचल में 10वां स्थान प्राप्त किया है।
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राघवी की पढ़ाई और परवरिश की जिम्मेदारी उसकी बुजुर्ग दादी ने संभाली। उन्होंने हर मुश्किल के बावजूद पोती की शिक्षा को कभी रुकने नहीं दिया। राघवी भी अपनी दादी की उम्मीदों पर खरी उतरी। उसने दिन-रात मेहनत कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे परिस्थितियां छोटी पड़ जाती हैं। उसकी यह सफलता अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे संघर्ष से निकली प्रेरणादायक कहानी बता रहे हैं।
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राघवी ने अपनी इस उपलब्धि को अपने दिवंगत माता-पिता, विशेष रूप से अपनी मां निशा वर्मा को समर्पित किया है। मातृ दिवस के मौके पर मिली यह सफलता उसके लिए भावुक पल बन गई। राघवी का कहना है कि अगर उसके माता-पिता आज साथ होते तो सबसे ज्यादा खुश वही होते।
हमीरपुर के नवदीप पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा राघवी अब भविष्य में भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS अधिकारी बनना चाहती है। उसका सपना देश सेवा करना और समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। राघवी ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी दादी, शिक्षकों और परिवार के सहयोग को दिया। उसने कहा कि कठिन परिस्थितियों ने उसे और मजबूत बनाया।
वहीं स्कूल प्रबंधन ने भी छात्रा की उपलब्धि पर खुशी जताई है। शिक्षकों का कहना है कि राघवी शुरू से ही मेहनती और अनुशासित छात्रा रही है। राघवी की यह कहानी आज उन हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो मुश्किल हालात में भी बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।