कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उनकी क्षमता को सही दिशा, उचित मार्गदर्शन और बेहतर अवसर मिलने की होती है। यही कारण है कि प्रदेश के युवा शिक्षा, खेल, प्रशासनिक सेवाओं और रक्षा क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।

 

देश सेवा का जज्बा भी हिमाचल के युवाओं में कूट-कूट कर भरा है, जिसका प्रमाण समय-समय पर देखने को मिलता रहता है, जब प्रदेश के युवा भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में बड़े पद हासिल कर राज्य का नाम रोशन करते हैं। 

 

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इसी कड़ी में कांगड़ा के एक और होनहार युवा ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन के दम पर आसमां की बुलंदियों को छूकर प्रदेश का नाम पूरे देश में रोशन किया है। कांगड़ा के शुभम राणा ने प्रतिष्ठित सीडीएस/एएफसीएटी-2025 परीक्षा को पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण कर भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनने का गौरव प्राप्त किया है।

सपनों को बनाया हकीकत

किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता, लेकिन जब लक्ष्य देश सेवा का हो तो मेहनत भी उसी स्तर की करनी पड़ती है। शुभम राणा ने भी अपने सपने को केवल सपना बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि उसे साकार करने के लिए लगातार प्रयास किए और आखिरकार सफलता उनके कदम चूमती नजर आई। पहले ही प्रयास में इतनी प्रतिष्ठित परीक्षा पास करना उनकी लगन, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम का परिणाम माना जा रहा है।

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शिक्षा के क्षेत्र में भी रहे अव्वल

शुभम राणा की सफलता के पीछे उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी रही है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कांगड़ा के जीएवी पब्लिक स्कूल तथा माऊंट कार्मल स्कूल गग्गल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, जालंधर से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य देश सेवा को बनाया और उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए भारतीय वायु सेना में अधिकारी बनने का सपना साकार कर दिखाया।

फौजी परिवार से मिला देशभक्ति का संस्कार

शुभम के जीवन में देश सेवा की भावना बचपन से ही मौजूद रही। उनके पिता विजय सिंह भारतीय सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। सेना के अनुशासित माहौल में पले-बढ़े शुभम ने बचपन से ही देशभक्ति, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों को करीब से देखा और सीखा। 

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उनकी माता वंदना राणा गृहिणी हैं और बेटे की इस उपलब्धि पर पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। परिवार का कहना है कि शुभम ने अपनी मेहनत से न केवल अपने माता-पिता का सपना पूरा किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम भी रोशन किया है।

क्षेत्र में खुशी का माहौल

जैसे ही शुभम राणा की सफलता की खबर सामने आई, परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे पूरे कांगड़ा जिले के लिए गर्व का क्षण बताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुभम की उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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स्कूल को भी अपने छात्र पर गर्व

अपने पूर्व छात्र की इस उपलब्धि से जीएवी पब्लिक स्कूल कांगड़ा में भी खुशी का माहौल है। स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने शुभम राणा को उनकी शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। स्कूल के शिक्षकों का मानना है कि शुभम की यह सफलता वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और उन्हें भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश देगी।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सफलता

आज के दौर में जहां कई युवा अपने करियर को लेकर असमंजस में रहते हैं, वहीं शुभम राणा की कहानी यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उनकी सफलता हिमाचल के हजारों युवाओं को यह संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर प्रयास के दम पर किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।

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