कांगड़ा/चंबा। हिमाचल प्रदेश की बेटियों ने आज हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का परचम लहराया है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर सच्चे मन से मेहनत और पढ़ाई की जाए, तो दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला की बेटी श्रेया वालिया ने। श्रेया ने न केवल अपनी असाधारण लगन से मेडिकल ऑफिसर कमीशन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है, बल्कि अपने परिवार और पूरे कांगड़ा जिले का नाम प्रदेश भर में रोशन कर दिया है।
रोजाना 12 घंटे की पढ़ाई
कहते हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और श्रेया की कहानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। चंबा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद श्रेया शांत नहीं बैठीं। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा लक्ष्य तय किया और उसे पाने के लिए जुट गईं। पिछले एक वर्ष से श्रेया हर दिन करीब 12 घंटे पढ़ाई करती थीं। दिन-रात की इसी मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने मेडिकल ऑफिसर कमीशन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की और अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश लोकसेवा आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए मेडिकल ऑफिसर की भर्ती का अंतिम परिणाम घोषित किया। जिसमें कांगड़ा जिला के नगरोटा बगवां की डॉ श्रेया वालिया ने पूरे हिमाचल में पहला स्थान हासिल किया है।
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दादा और नाना का सपना किया पूरा
इस उपलब्धि के पीछे एक भावनात्मक कहानी भी जुड़ी हुई है। श्रेया के दिवंगत दादा चुनी लाल वालिया और नाना ईश्वर दास कपूर का सपना था कि उनकी लाडली एक सफल डॉक्टर बने और समाज की सेवा करे। हालांकि आज वे इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी इच्छाएं और आशीर्वाद हमेशा श्रेया के साथ रहे। श्रेया ने अपने दादा और नाना के इस सपने को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया था। उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ तैयारी की और आखिरकार वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसका सपना उनके परिवार ने वर्षों पहले देखा था।
एक साल तक नहीं छोड़ा मेहनत का साथ
मेडिकल ऑफिसर बनने का रास्ता आसान नहीं था। इसके लिए श्रेया ने अपने निजी जीवन की कई खुशियों और आराम को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने लगातार एक साल तक प्रतिदिन 12 घंटे अध्ययन किया। कठिन विषयों पर विशेष फोकस किया और अपनी तैयारी को पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाया। उनकी यह मेहनत आज हजारों युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि इसके लिए लगातार मेहनत और धैर्य की जरूरत होती है।
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परिवार बना सबसे बड़ी ताकत
श्रेया का कहना है कि उनकी सफलता में परिवार की अहम भूमिका रही है। उनके पिता डॉ. सुरेश वालिया लोक निर्माण विभाग में अधिशासी अभियंता हैं, जबकि माता अंजू वालिया शिक्षण सेवा से सेवानिवृत्त हैं। बड़े भाई अंशुल वालिया भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। श्रेया बताती हैं कि कठिन समय में परिवार ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया और उन्हें अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने के लिए प्रेरित किया। यही पारिवारिक सहयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना।
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चंबा मेडिकल कॉलेज से मिली मजबूत नींव
श्रेया ने चंबा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज में बिताए गए पांच वर्षों ने उन्हें एक बेहतर चिकित्सक और बेहतर इंसान बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कॉलेज के शिक्षकों और वरिष्ठ चिकित्सकों के मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को मजबूत आधार दिया।
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चंबा की सेवा करने की इच्छा
सफलता हासिल करने के बाद भी श्रेया अपनी जड़ों को नहीं भूली हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उन्हें अपने गृह जिला चंबा में सेवाएं देने का अवसर मिलता है तो वह पूरे समर्पण के साथ लोगों की सेवा करना चाहेंगी। उनका मानना है कि अपने क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए काम करना उनके लिए गर्व की बात होगी।
पूरे प्रदेश के लिए बनी प्रेरणा
श्रेया वालिया की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी उपलब्धि केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे चंबा और हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन गई है। आज श्रेया उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि इरादे मजबूत हों तो सफलता एक दिन जरूर कदम चूमती है।
