कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के युवाओं के दिल में देशसेवा का जज्बा किस कद्र भरा है, इसकी मिसाल आए दिन सामने आती रहती है। यहां कई युवा सरकारी नौकरी हासिल करने के बाद भी अपने बड़े सपने को मरने नहीं देते और उसे पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते रहते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी कांगड़ा जिले के फतेहपुर क्षेत्र के पट्टा जाटियां गांव के विकास गुलेरिया की है, जिन्होंने पहले हिमाचल पुलिस की वर्दी पहनी और अब भारतीय सेना की अफसर वाली वर्दी पहनकर देशसेवा के लिए तैयार हैं।
विकास गुलेरिया ने हिमाचल पुलिस में कांस्टेबल के रूप में करीब तीन साल सेवाएं दीं, लेकिन पुलिस की नौकरी मिलने के बाद उन्होंने अपने सेना में अफसर बनने के सपने को खत्म नहीं होने दिया। ड्यूटी की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी। उनकी इसी जिद, मेहनत और अनुशासन ने आखिरकार उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया, जिसका उन्होंने सपना देखा था।
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5 सितंबर को कंधों पर सजे लेफ्टिनेंट के सितारे
विकास और उसके परिवार के लिए 5 सितंबर 2026 का दिन हमेशा यादगार रहेगा। इसी दिन उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई से सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया और भारतीय सेना में स्थायी कमीशन प्राप्त कर लेफ्टिनेंट बने। एक तरफ वह दौर था जब विकास हिमाचल पुलिस में कांस्टेबल बनकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मन में भारतीय सेना में अधिकारी बनने की चाह लगातार बनी हुई थी। नौकरी के साथ पढ़ाई और सेना की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन विकास ने परिस्थितियों को अपने सपने के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।
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वर्दी बदली, लेकिन देशसेवा का जज्बा वही रहा
विकास की कहानी की सबसे खास बात यही है कि उनके लिए वर्दी सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि देशसेवा का माध्यम रही। हिमाचल पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर सेवा देते हुए उन्होंने सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य तय किया। वर्ष 2022 से 2025 तक हिमाचल पुलिस में सेवाएं देने के दौरान भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। आखिरकार सितंबर 2024 में उन्होंने CDS यानी Combined Defence Services की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। इसके बाद उनका चयन ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई के लिए हुआ, जहां उन्होंने कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया।
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पढ़ाई में भी शुरू से रहे होनहार
विकास गुलेरिया ने पढ़ाई में भी लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने वर्ष 2017 में कॉन्वेंट मेंसा स्कूल देहरी से CBSE की दसवीं कक्षा की परीक्षा 10 CGPA के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजा का तालाब से नॉन-मेडिकल विषय में जमा दो की पढ़ाई पूरी की और 90 प्रतिशत अंक हासिल किए। वर्ष 2022 में उन्होंने वजीर राम सिंह राजकीय महाविद्यालय देहरी से B.Sc. की डिग्री 80 प्रतिशत अंकों के साथ पूरी की।
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मेहनत के दम पर हासिल किया मुकाम
विकास गुलेरिया की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनका परिवार किसी सैनिक पृष्ठभूमि से नहीं आता। उनके पिता विभीषण सिंह निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं, जबकि उनकी माता मीनू गृहिणी हैं। एक सामान्य परिवार से निकलकर पहले पुलिस में नौकरी हासिल करना और फिर उसी नौकरी के साथ सेना में अधिकारी बनने की तैयारी करना विकास की दृढ़ इच्छाशक्ति को दिखाता है। विकास अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, चचेरी बहन आंचल गुलेरिया, अध्यापकों और अपनी निरंतर मेहनत को देते हैं। उनकी छोटी बहन दीक्षा गुलेरिया बॉटनी में एमएससी की पढ़ाई कर रही हैं।
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माता-पिता के लिए गर्व का सबसे बड़ा पल
5 सितंबर को जब विकास ने OTA चेन्नई की पासिंग आउट परेड में कदम बढ़ाया और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में स्थायी कमीशन हासिल किया, तो यह सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे परिवार के लिए भावुक और गौरवपूर्ण क्षण था। जिस बेटे को कभी पुलिस कांस्टेबल की वर्दी में ड्यूटी करते देखा था, उसी बेटे को अब सेना की अफसर वाली वर्दी में देखना परिवार के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।
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कांस्टेबल से लेफ्टिनेंट तक… मेहनत की मिसाल
विकास गुलेरिया ने अपनी कहानी से एक बात साफ कर दी है—सपना बड़ा हो तो रास्ते में आने वाली मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं। उन्होंने सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी अपने सपने को मरने नहीं दिया। ड्यूटी निभाई, पढ़ाई जारी रखी, CDS की तैयारी की, परीक्षा पास की, चेन्नई में कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और आखिरकार भारतीय सेना के कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे सजा लिए।
