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September 2, 2026
हिमाचल : मजदूरी करते हुए पढ़ाई नहीं छोड़ी, दो बार हुए फेल- तीसरी कोशिश में बने टीचर
गरीबी के बीच मजदूरी करके उठाया पढ़ाई का खर्च
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मंडी। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो गरीबी भी सफलता की राह नहीं रोक सकती। हिमाचल के सरोआ निवासी 42 वर्षीय रोशन लाल ने इस बात को सच कर दिखाया है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद उन्होंने मजदूरी करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी। अब उनका चयन CBSC में म्यूजिक टीचर के पद पर भी हुआ है। रोशन लाल की यह कहानी संघर्ष, मेहनत और कभी हार न मानने की मिसाल बन गई है।
रोशन लाल ने अपनी शुरुआती और हाई स्कूल की पढ़ाई सरोआ स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने पंडोह स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और मंडी कॉलेज से बीए किया। आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने म्यूजिक और हिस्ट्री में डबल एमए किया। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से बीएड और एमफिल तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से डीएलएड की डिग्री हासिल की।
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कमीशन की परीक्षा पास करना रोशन लाल के लिए आसान नहीं था। उन्होंने पहली बार 2012 में परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2017 में दोबारा कोशिश की, लेकिन इस बार भी असफल रहे। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और आखिरकार 2026 में तीसरी कोशिश में कमीशन की परीक्षा पास कर ली।
रोशन लाल को एमफिल की परीक्षा में भी दो बार असफलता का सामना करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों को दूर किया और तीसरी बार पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दी। इस बार उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि हिमाचल में टॉप करके अपनी काबिलियत साबित कर दी।
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रोशन लाल के पिता परस राम मजदूरी करते हैं और उनकी माता ब्रेसती देवी गृहिणी हैं। उनके दोनों भाई भी मेहनत-मजदूरी से जुड़े हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए रोशन लाल को बचपन से ही पढ़ाई के साथ मजदूरी भी करनी पड़ी। उन्होंने कभी अपनी आर्थिक स्थिति को सफलता के रास्ते में नहीं आने दिया।
रोशन लाल लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2012-13 में पालमपुर डीएवी में सेवाएं दीं। इसके बाद 2013-14 और 2014-15 में नव भारती पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सरोआ में काम किया। साल 2015 से वह एमएस पब्लिक स्कूल सरोआ में मुख्याध्यापक और चेयरमैन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
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रोशन लाल का संगीत से भी गहरा जुड़ाव है। वह धार्मिक कार्यक्रमों में भजन और कीर्तन प्रस्तुत करते हैं। इसके साथ ही वह विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों को संगीत की शिक्षा भी देते रहे हैं। हिमाचली मेलों और अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी वह अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं।
रोशन लाल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग और संस्कारों, पत्नी पार्वती देवी के सहयोग और अपने संगीत गुरु डॉ. कल्याण चंद मंढोत्रा को दिया। उन्होंने बताया कि मुश्किल आर्थिक दौर में डॉ. मंढोत्रा ने उन्हें सुबह-शाम निशुल्क संगीत की शिक्षा दी। इसी मार्गदर्शन ने उनकी संगीत की यात्रा को मजबूत आधार दिया।
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रोशन लाल का कहना है कि जिंदगी में असफलता आने पर कभी प्रयास बंद नहीं करना चाहिए। उनका खुद का सफर इस बात की मिसाल है कि परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान लगातार मेहनत करता रहे और अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ रहे तो सफलता जरूर हासिल की जा सकती है।