#हादसा
September 6, 2026
हिमाचल : एक साथ हुआ 3 दोस्तों का अंतिम संस्कार, इकलौते बेटे की अर्थी से लिपटी रही मां
दो मासूम बच्चों से छिन गया पिता, सदमे में परिवार
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की दरीणी पंचायत का झुनैणा गांव उस समय मातम में डूब गया- जब एक साथ तीन जवान बेटों के शव गांव पहुंचे। शनिवार शाम करीब सात बजे जैसे ही अशोक कुमार, प्रिंस और पवन कुमार के शव उनके घर पहुंचे, परिवारों में चीख-पुकार मच गई।
जिन बेटों से माता-पिता को बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद थी, उन्हें खोने का दुख परिवारों के लिए असहनीय था। रविवार सुबह जब तीनों युवकों की अर्थियां एक साथ उठीं तो पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। एक ही गांव के तीन युवकों की एक साथ हुई मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
जानकारी के अनुसार झुनैणा गांव के तीनों युवक नजदीकी गांव दूली में आयोजित गुग्गा महाराज की फेरी में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद तीनों बाइक पर सवार होकर वापस अपने गांव की ओर लौट रहे थे।
बताया जा रहा है कि रात के समय भलेड़ पावर हाउस के पास उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
दरीणी पंचायत के उपप्रधान हंसराज और वार्ड सदस्य राजेश कुमार के अनुसार बाइक का नंबर HP 54A 7983 था और इसे अशोक कुमार चला रहे थे। बताया गया कि दूली गांव से करीब तीन किलोमीटर और झुनैणा गांव से लगभग 10 किलोमीटर पहले भलेड़ पावर हाउस के पास यह हादसा हुआ। हादसे में 30 वर्षीय पवन कुमार की मौत हो गई, जबकि 38 वर्षीय अशोक कुमार और 18 वर्षीय प्रिंस गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार हादसा रात के समय हुआ, जिसके कारण इसकी जानकारी तत्काल नहीं मिल पाई। घायल अशोक और प्रिंस पूरी रात खाई में पड़े रहे। वहीं, जब तीनों युवक देर रात तक घर नहीं पहुंचे तो उनके परिजनों ने उन्हें फोन करना शुरू किया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की।
परिजनों ने शुरुआत में यही समझा कि शायद युवक किसी परिचित के घर रुक गए होंगे। गांव में सावन माह के दौरान कौड़ी खेलने की परंपरा भी है और तीनों युवक नियमित रूप से कौड़ी खेलने जाते थे। गांव के कुछ लोगों ने भी उन्हें फोन किया, लेकिन किसी से संपर्क नहीं हो सका।
हादसे में जान गंवाने वाले तीनों युवक अपने-अपने परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा थे। 18 वर्षीय प्रिंस दसवीं कक्षा तक पढ़े थे और परिवार की आर्थिक मदद के लिए दिहाड़ी मजदूरी करते थे। वह अपनी छोटी बहन श्रेया के इकलौते भाई थे। करीब एक सप्ताह पहले ही श्रेया ने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधी थी। भाई की मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
38 वर्षीय अशोक कुमार परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने वाले सदस्य थे। वह बोटी (रसोइये) का काम करते थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा सात वर्षीय बेटा दिवांश और तीन वर्षीय बेटी नायरा हैं। अशोक की मौत के बाद दोनों छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। वहीं 30 वर्षीय पवन कुमार अविवाहित थे। वह भी बोटी का काम करके अपना जीवन यापन करते थे। तीनों युवकों की मौत से झुनैणा गांव में शोक की लहर है।
रविवार सुबह जब तीनों युवकों की अंतिम यात्रा निकली तो गांव का माहौल बेहद भावुक हो गया। एक ही गांव से एक साथ तीन जवान बेटों की अर्थियां उठना हर किसी के लिए हृदयविदारक दृश्य था। परिवारों के विलाप और ग्रामीणों की नम आंखों के बीच तीनों युवकों को अंतिम विदाई दी गई।