हमीरपुर। मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण जब एक ही परिवार में एक साथ दिखाई दे तो सफलता भी इतिहास रच देती है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के भोरंज क्षेत्र से ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी सामने आई हैए जहां देवर और भाभी ने एक साथ शानदार सफलता हासिल कर पूरे प्रदेश में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिया। हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की मेडिकल ऑफिसर परीक्षा में सगे देवर-भाभी ने मेडिकल ऑफिसर बन कर पूरे प्रदेश में मिसाल कायम की है। खास बात यह है कि परिवार में पहले से एक डॉक्टर मौजूद थे और अब घर में डॉक्टरों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।

प्रदेश में चौथा रैंक हासिल कर चमके रवि कांत

भोरंज उपरला के रहने वाले रवि कांत ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित मेडिकल ऑफिसर परीक्षा में प्रदेशभर में चौथा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भोरंज से पूरी की और इसके बाद डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित होने पर रवि कांत का नाम प्रदेश के टॉप अभ्यर्थियों में शामिल रहा। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे भोरंज क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ा दी है।

 

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भाभी डॉ प्रियंका ने हासिल की शानदार सफलता

रवि कांत की सगी भाभी डॉ. प्रियंका कुमारी ने भी मेडिकल ऑफिसर परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 28वां स्थान प्राप्त किया है। डॉ. प्रियंका ने प्रारंभिक शिक्षा शिमला के डीएवी स्कूल से ग्रहण की, जबकि जमा दो तक की पढ़ाई साईं विजन पब्लिक स्कूल भरेड़ी से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की और अब मेडिकल ऑफिसर परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपने सपनों को नई उड़ान दी है। उनकी इस उपलब्धि को परिवार और क्षेत्र के लोग विशेष गर्व के साथ देख रहे हैं।

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एक ही घर में तीन डॉक्टर, बनी मिसाल

इस सफलता को और भी खास बनाती है परिवार की चिकित्सा क्षेत्र में मजबूत मौजूदगी। रवि कांत के बड़े भाई डॉ. कपिल कुमार पहले से ही डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में नेत्र रोग विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। कुछ समय पहले ही डॉ. कपिल कुमार का विवाह डॉ. प्रियंका कुमारी से हुआ था। अब रवि कांत और डॉ. प्रियंका के मेडिकल ऑफिसर बनने के बाद परिवार में दो भाई और एक बहू सहित तीन डॉक्टर हो गए हैं। यह उपलब्धि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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माता-पिता की आंखों में छलकी खुशी

रवि कांत के पिता ध्यान सिंह व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। बच्चों की इस सफलता पर परिवार बेहद उत्साहित है। उनका कहना है कि यह वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बच्चों ने जिस समर्पण के साथ पढ़ाई की, उसी का फल आज उन्हें मिला है। परिजनों के अनुसार परिवार में एक साथ तीन डॉक्टर होना किसी सपने के साकार होने जैसा है और यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

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युवाओं के लिए बनी प्रेरणा की मिसाल

भोरंज क्षेत्र के लोगों ने भी दोनों की सफलता पर खुशी जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं होता। रवि कांत और डॉ. प्रियंका ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। दोनों की सफलता अब क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है और युवा उन्हें अपना आदर्श मानकर आगे बढ़ने का संकल्प ले रहे हैं।

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